नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री से की जांच की मांग एक पत्र के माध्यम से बहुचर्चित वन कटान के खिलाफ व विभाग की चुप्पी पर - Smachar

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नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री से की जांच की मांग एक पत्र के माध्यम से बहुचर्चित वन कटान के खिलाफ व विभाग की चुप्पी पर

 नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री से की जांच की मांग एक पत्र के माध्यम से बहुचर्चित वन कटान के खिलाफ व विभाग की चुप्पी पर 


 नूरपुर : विनय महाजन /

 नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में क्या वन माफिया तथा विभागीय तंत्र की साठ गांठ इतनी गहरी व सशक्त है, कि संबंधित क्षेत्र के लोगों द्वारा वन संपदा के सफाए को सप्रमाण भेजे जाने के बावजूद कई दिन बीत जाने पर भी विभाग न तो कटान के तथ्य जुटा पाया। ना ही वृक्षों को बेरहमी से काटे जाने पर कोई अंकुश लगा पायाl ऐसी चर्चाएं क्षेत्र में चर्चित हैं l इस मामले में लोगो ने मुख्यमंत्री से प्रदेश उच्च स्तरीय मांग हेतु एक पत्र भी लिखा है l गौरतलव है कि क्षेत्र की भलून पंचायत के अन्य स्थानो मे भी कटान की चर्चाएं लोगों की जुबान पर चर्चित हैंl क्षेत्र वासियों का कहना है कि गत 2 सप्ताह खैरों के कथित कटान की जानकारी विभाग को दी गई थी। इतना ही नहीं जिला कांगड़ा के निचले क्षेत्रों में भी अवैध कटान की चर्चाएं लोगों की जुबान पर चर्चित हैlगौरतलब विभाग द्वारा हर बार यही बताया गया कि विभागीय स्टाफ को इस कटान की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात वाली कहावत को चरित्रार्थ करते हैं। जब तक कथित जांच शुरू होती है। तब तक जंगल से यह समस्त कट चुके पेड़ मुख्य सड़क पर ही स्थित डंप पर पहुंचकर जीपों में भरकर आगे कत्था बनाने वाली इकाइयों के पास पहुंच जाते हैं। जानकारी देने वाले स्थानीय लोग हैरान हो जाते है आखिरकार विभाग चुप क्यों? गौरतलब है कि 15 दिन पहले स्थानीय लोगों द्वारा वन विभाग नूरपुर को शिकायत भेजी गई थी कि बन माफिया द्वारा भलून क्षेत्र के जंगल में भारी संख्या में खैर के वृक्षों का कटान किया गया है कटान के साक्ष्य भी भेजे गए थे जिस पर इस मामले मे वन मंडल अधिकारी नूरपुर ने आश्वासन दिया कि इसकी जांच की जाएगी लेकिन घटना को हुए दो सप्ताह बीत गए हैं तथा विभाग द्वारा किसी प्रकार की जांच तो दूर इस मामले मे स्थानीय लोगों के साथ भी कोई संपर्क नहीं किया गया है जो इस कटान की जानकारी रखते हैं। उधर क्षेत्र में आखिरकार विपक्ष व कुछ सामाजिक संस्थाएं जो नूरपुर में विधानसभा का अगला चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं वह इस मामले में चुप क्यों? सत्ताधारी संगठन पार्टी के पदाधिकारी भी इस मामले में चुप आखिरकार क्यों? लोगों को कहना है कि राजनीतिक दबाव के कारण विभाग इस मामले की जांच धरातल पर निष्पक्ष करने में असमर्थ है l

इस मामले मे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ के सह निदेशक राजेश पठानिया ने कहते हुए यह आरोप लगाया कि विभाग द्वारा संबंधित क्षेत्र के स्टाफ को ही वहां हुए कटान की जांच के लिए कह देता है। जबकि यही स्टाफ वन माफिया के साथ इस कटान में संलिप्त होता है। इस मामले मे संदीप कोहली डी एफ ओ नूरपुर का कहना है कि लोगों के द्वारा सूचना दिए जाने पर इस मामले में चकबन वासा में एक टीम को जांच के लिए भेजा था अभी तक जांच की रिपोर्ट नहीं आई है जैसे ही रिपोर्ट आएगी ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगीl 

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