धमेटा के विशाल दंगल में गूंजी पहलवानों की हुंकार, महाराष्ट्र के बालू बोटके बने विजेता

धमेटा के विशाल दंगल में गूंजी पहलवानों की हुंकार, महाराष्ट्र के बालू बोटके बने विजेता

सेवा निवृत्त आईएएस विकास लाबरू बोले — अब हर वर्ष 21 मई को आयोजित होगा धमेटा दंगल


 नूरपुर : विनय महाजन /

 नूरपुर प्रदेश के जिला कांगड़ा के विधानसभा क्षेत्र के कस्बा धमेटा में आयोजित विशाल दंगल मेले में देशभर के पहलवानों ने अपने दमखम का प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र के बालू बोटके विजेता बने जबकि अमृतसर के सानबीर कोहाली उपविजेता रहे। दंगल में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी एवं उद्योगपति विपिन पठानिया और विशेष अतिथि के रूप में सेवा निवृत्त आईएएस विकास लाबरू मौजूद रहे। इस अवसर पर धमेटा की धरती पर सजा विशाल दंगल मेले का अखाड़ जहां देशभर से पहुंचे नामी पहलवानों ने अपने शानदार दांव-पेच से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से पहुंचे पहलवानों के मुकाबले देखने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे।दंगल का मुख्य मुकाबला महाराष्ट्र के बालू बोटके ने जीतकर अपने नाम किया, जबकि अमृतसर के सानबीर कोहाली उपविजेता रहे। पूरे दिन चले रोमांचक मुकाबलों ने दर्शकों में खासा उत्साह बनाए रखा।

दंगल मेले में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उद्योगपति एवं समाजसेवी विपिन पठानिया ने आयोजन के लिए 10 लाख रुपये दिए। उन्होंने कहा कि दंगल हमारी संस्कृति, भाईचारे और पारंपरिक खेलों की पहचान हैं तथा ऐसे आयोजन युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। विशेष अतिथि सेवा निवृत्त आईएएस विकास लाबरू ने विजेता एवं उपविजेता पहलवानों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिस तरह पहलवान अखाड़े में संघर्ष कर जीत हासिल करता है, उसी तरह क्षेत्र के युबा विलियम पठानिया ने जीवन में मेहनत और संघर्ष से सफलता मिलती है धमेटा का यह विशाल दंगल आज पूरे हिमाचल प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। इस बार महाराष्ट्र के बालू बोटके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दंगल जीता, जबकि अमृतसर के सानबीर कोहाली उपविजेता रहे। देशभर से पहुंचे पहलवानों ने बेहतरीन मुकाबले दिखाए हैं। मैं मुख्य अतिथि समाजसेवी एवं उद्योगपति विपिन पठानिया का भी विशेष धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने दंगल के लिए 10 लाख रुपये दिए। छोटी उम्र में उन्होंने मेहनत और संघर्ष से अपनी अलग पहचान बनाई है और समाजसेवा में भी बढ़-चढ़कर योगदान दे रहे हैंl पहले यह मेला 10 जून को आयोजित होता था, लेकिन अब यह हर वर्ष 21 मई को आयोजित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि यह दंगल आने वाले समय में और बड़ा बने तथा हमारी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाता रहे।-महादेव दंगल कमेटी के प्रधान अश्वनी राणा ने बताया कि गांव के बुजुर्गों के आशीर्वाद और युवाओं की मेहनत से यह आयोजन आज प्रदेश के बड़े दंगलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

दंगल मेले में पहुंचे हजारों लोगों ने पहलवानों का उत्साह बढ़ाया और पारंपरिक खेल संस्कृति का भरपूर आनंद लिया।

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