4 साल से बंद कांगड़ा रेल सेवा रेल पुल बनने के बाद भी आज तक शुरू नहीं की गई जबकि इसके ट्रायल काफी हो चुके
4 साल से बंद कांगड़ा रेल सेवा रेल पुल बनने के बाद भी आज तक शुरू नहीं की गई जबकि इसके ट्रायल काफी हो चुके
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर रेलवे परामर्श समिति सदस्य व नूरपुर क्षेत्र के निवासी दीपक भारद्वाज ने ट्रायल के बाबजूद काँगड़ा घाटी रेल सेवा को शुरू ना कर पाने पर अपनी पीड़ा व्यक्त की है।उन्होनें कहा कि जिला काँगड़ा पर्यटन की बैंड बज गयी और रेलसेवा के चार साल से बन्द रहने से एक साल से चक्की पुल तैयार है पर नही चल पाई रेल आखिरकार क्यों? कुछ माह से लोगों को आश्वासन देने के लिए ट्रायल जारी है पता नहीं कितना पैसा इसमें खर्च हो गया है l ऐसी चर्चा क्षेत्र में चर्चित l
कांगड़ा घाटी रेल केवल एक रेल सेवा नहीं बल्कि विश्व व हिमाचल प्रदेश विशेषकर कांगड़ा जिले के लाखों लोगों की भावनाओं आजीविका और वर्षों पुरानी विरासत से जुड़ी पहचान है। शायद ही कांगड़ा का कोई ऐसा परिवार होगा जिसका इस ऐतिहासिक रेल से कोई न कोई संबंध न रहा हो। आज इस रेल सेवा का लंबे समय से बंद रहना लोगों के लिए गहरी चिंता और पीड़ा का विषय बना हुआ है।इसी संदर्भ में जोनल रेलवे कमेटी, नॉर्दर्न रेलवे के सदस्य दीपक भारद्वाज ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे लगातार कांगड़ा घाटी रेल को पुनः सुचारु रूप से चलवाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पूर्व जोनल रेलवे कमेटी की पहली बैठक में उन्होंने इस विषय को प्रमुखता से उठाया था तथा चक्की पुल को शीघ्र चालू करने और कांगड़ा घाटी रेलवे के आधुनिकीकरण की मांग रखी थी।
भारद्वाज ने जानकारी दी कि आज एक वर्ष बाद चक्की पुल लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है तथा कांगड़ा घाटी रेल के कई सफल ट्रायल भी किए जा चुके हैं। उन्होंने पूर्व मंडल प्रबंधक अशोक वर्मा एवं तत्कालीन महाप्रबंधक राजेश पांडे से भी मुलाकात कर स्थिति की जानकारी ली थी। दोनों अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि सेफ्टी रिपोर्ट भी प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर किस कारणवश इस ऐतिहासिक रेल सेवा को शुरू करने में देरी की जा रही है।उन्होंने कहा कि कांगड़ा घाटी रेल किसी प्रकार की राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए। यह रेल लोगों की भावनाओं, व्यवसाय, पर्यटन और आम जन की आवाजाही का महत्वपूर्ण साधन है। इस पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पहले रेल राज्य मंत्री के पठानकोट दौरे के बाद यह चर्चा चली कि ट्रेन को पठानकोट के बजाय डलहौजी रोड से चलाया जाएगा, जिसके विरोध में कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति ने पूरे जिले में प्रदर्शन और धरने दिएl दीपक भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, रेल मंत्री कार्यालय तथा रेलवे के सभी संबंधित अधिकारियों तक पत्र और व्यक्तिगत बैठकों के माध्यम से यह विषय लगातार पहुंचाया। उन्होंने राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा को भी पत्र लिखा था।अनुराग शर्मा द्वारा शपथ ग्रहण के बाद सबसे पहले कांगड़ा घाटी रेल का विषय उठाए जाने पर उन्होंने उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति धरातल से जुड़ा होता है, वही जनता की भावनाओं और इस रेल की वास्तविक महत्ता को समझ सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि यदि हिमाचल प्रदेश से जुड़े अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और नेता भी मिलकर गंभीरता से प्रयास करते तो आज कांगड़ा की जनता को बार-बार प्रदर्शन और लंबे इंतजार का सामना न करना पड़ता। रेल सेवा बंद रहने से जहां स्थानीय लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है वहीं देशभर से आने वाले पर्यटक भी प्रभावित हो रहे हैं और रेलवे विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।भारद्वाज ने पहली बैठक को एक वर्ष पूरा होने और लगातारअधिकारियों तक आवाज उठाने के बावजूद जब रेल सेवा शुरू नहीं हुई l उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि पूरे कांगड़ा क्षेत्र की आवाज है।
उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान हिमाचल प्रदेश से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने घोषणा की थी कि 2 जून से ट्रेन सेवा पुनः शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में अब जनता की अपेक्षा है कि 2 जून से ट्रेन पठानकोट से जोगिंदर नगर तक नियमित रूप से चलाई जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले नेताओं को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।भारद्वाज ने केंद्र सरकार, रेल मंत्रालय और सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि कांगड़ा घाटी रेल को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए। यह केवल एक रेल नहीं, बल्कि कांगड़ा और हिमाचल प्रदेश के लोगों की भावना और धरोहर है।

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