ऑनलाइन दवा बिक्री पर देश भर में मेडिकल स्टोर बंद रहे
ऑनलाइन दवा बिक्री पर देश भर में मेडिकल स्टोर बंद रहे
ऑनलाइन दवा बिक्री पर देश भर में रहे मेडिकल स्टोर बंद रहे जबकि प्रदेश में अस्पताल के अंदर हिमाचल प्रदेश खाद्य आपूर्ति निगम द्वारा संचालित दवाइयो की दुकाने रोजाना की तरह काम करती रहीl वही देश भर में दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर आज भारत भर में दवाइयों की दुकानें बंद रहीं। जिसका प्रभाव जिला काँगड़ा हिमाचल प्रदेश में भी देखने को मिला। इस अवसर पर प्रेजिडेंट सुरेश वासुदेवाय व महा सचिव राजेश शर्मा व संग़ठन सचिव प्रणव सचदेवा डिस्ट्रिक्ट काँगड़ा केमिस्ट्रीस एंड ड्रगजिस्ट्रीस अलायंस केमिस्ट संगठन का साफ तौर पर कहना था कि खुलेआम बिना किसी नियम के ऑनलाइन दवा की बिक्री के चलते ही उन्हें इस बंद का आह्वान करना पड़ रहा है।इस आह्वान पर प्रदेश मे में लगभग सुबह से ही सभी मेडिकल स्टोर बंद रहे जबकि सरकारी अस्पतालों मे मेडिकल स्टोर इसलिए रखे गए कोई जनहानि ना हो तथा आपातकालीन स्थिति में कोई रुकावट ना आए l इस मामले में अस्पताल के अंदर नूरपुर में हिमाचल प्रदेश खाद्य आपूर्ति निगम की दुकान के फार्मासिस्ट आशीष शर्मा से पूछा गया उन्होंने कहा कि हमारा ऑनलाइन हड़ताल से कोई मतलब नहीं है l हालांकि बाहर बाज़ार में लोगों को दवाइयों की खरीदारी के लिए मेडिकल स्टोर्स से हताश होकर भी लौटना उस समय पड़ा जब लोगों को यह पता चला कि अंदर अस्पताल में दुकाने खुली है लेकिन फिर भी उन्होंने इस अवसर पर पूरी सेवाए दी जिसका लोगों ने फायदा लियाl रोजमरा की दवाइयां लेने वाले लोग आज काफी परेशान नजर आए इस ऑनलाइन हड़ताल सेl इस अवसर पर महा सचिव राजेश शर्मा डिस्ट्रिक्ट काँगड़ा केमिस्ट्रीस एंड ड्रगजिस्ट्रीस अलायंस केमिस्ट संगठन का साफ तौर पर कहना था कि कोई भी दवा विक्रेता कतई नहीं चाहता कि किसी भी मरीज़ या आम जनमानस को मेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण कोई दिक्कत हो, लेकिन यह बंद अब जरूरी हो चुका था। उन्होंने कहा कि दवा विक्रेताओं को दवा बेचने हेतु जिन नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है, आनलाइन दवा बिक्री पर भी वही नियम सख्ती से लागू होने चाहिए, ताकि किसी की भी सेहत से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न किया जा सके। क्योंकि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान कोई भी व्यक्ति चालाकी से प्रतिबंधित विशेषकर नशीली दवाईयां आसानी से खरीद सकता है जिसका सीधा प्रभाव स्वास्थ पर होगा। उन्होंने देश के प्रधान मंत्री मोदी से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। राजेश शर्मा का कहना है कि देश भर में तकरीबन 12.40 लाख व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से इस कार्य से जुड़े हैं, जबकि कुल मिलाकर 4 करोड़ के करीब व्यक्ति इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। अतः सभी के लिए समान कार्य और समान नियम लागू करना अब समय की सख़्त दरकार बन चुका है। केमिस्ट एसोसिएशन का यह भी कहना था कि गत साल टांडा मेडिकल कॉलेज में जब कांगड़ा के केमिस्टों के सेमिनार में ड्रग्स अथॉरिटी के साथ हुई थी तो उसमें भी यह मुद्दा गंभीरता से उठाया गया था उसे पर उसे समय उन्होंने जवाब दिया कि हम मजबूर हैं केंद्र से हमें कोई गाइडलाइन नहीं मिली है इसलिए हम इस मामले में कुछ नहीं कर सकते l सभी केमिस्टों ने देश और प्रदेश में भारत सरकार को जगाने के लिए आखिरकार इस कदम को उठाया है ताकि मोदी सरकार इस पर गौर करेंl

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