फतेहपुर से डॉ. रविंद्र उपाध्याय ने ठोकी दावेदारी, बोले—“टिकट मिला तो रचूंगा इतिहास”
फतेहपुर से डॉ. रविंद्र उपाध्याय ने ठोकी दावेदारी, बोले—“टिकट मिला तो रचूंगा इतिहास”
ज्वाली : राजेश कतनौरिया /
फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पूर्व राजस्व मंत्री डॉ. राजन सुशांत के छोटे भाई डॉ. रविंद्र उपाध्याय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से चुनाव लड़ने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है।
डॉ. रविंद्र उपाध्याय शुरू से ही भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1979 में दसवीं कक्षा के बाद छात्र राजनीति में कदम रखते हुए एबीवीपी से जुड़ाव किया। इसके बाद वर्ष 1984 में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर (हिमाचल प्रदेश) में छात्र संगठन के अध्यक्ष बने। वर्ष 1985 में उन्होंने भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और 1999 तक सक्रिय रूप से संगठन के लिए कार्य किया।
उपाध्याय ने बताया कि वर्ष 1999 में उन्हें हिमाचल प्रदेश सरकार के कृषि विभाग में फतेहपुर ब्लॉक में कृषि प्रसार अधिकारी के रूप में नियुक्ति मिली। वर्ष 2008 में पदोन्नति के बाद वे कृषि विकास अधिकारी बने और वर्ष 2017 में विषय विशेषज्ञ के पद पर पदोन्नत हुए। मार्च 2021 में वे सेवानिवृत्त हो गए।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पुनः भाजपा में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी। पार्टी ने उन्हें देव समाज प्रकोष्ठ, जिला नूरपुर का सह-संयोजक बनाया और वर्तमान में वे बुदिजीवी प्रकोष्ठ, भाजपा जिला नूरपुर के संयोजक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
डॉ. उपाध्याय का कहना है कि चुनाव लड़ना हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और इसी भावना के तहत वे फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में डोर-टू-डोर जाकर जनता से संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र की जनता स्वयं उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित कर रही है और पूरा समर्थन देने का भरोसा भी जता रही है।
उन्होंने कहा कि यदि भाजपा हाईकमान उन्हें टिकट देती है, तो वे निश्चित रूप से फतेहपुर सीट जीतकर इतिहास रचेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले लगभग 25 वर्षों से भाजपा इस सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई है, लेकिन वे इस बार जीत सुनिश्चित करेंगे।
डॉ. उपाध्याय के चुनाव मैदान में उतरने से समर्थकों में उत्साह का माहौल है। लंबे समय तक कृषि विभाग में सेवाएं देने के कारण वे क्षेत्र में अच्छी पहचान रखते हैं और आम जनता से उनका सीधा जुड़ाव रहा है।

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