दृष्टि से प्रभाव तक: एएनआरएफ़ के सीईओ का आईआईटी मंडी दौरा, शोध व नवाचार को मिली नई दिशा

 दृष्टि से प्रभाव तक: एएनआरएफ़ के सीईओ का आईआईटी मंडी दौरा, शोध व नवाचार को मिली नई दिशा


मंडी : अजय सूर्या /

 इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मंडी में देश के शोध एवं नवाचार परिदृश्य को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जब डॉ. शिवकुमार कल्याणरामन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ), 9 से 12 अप्रैल 2026 तक संस्थान के दौरे पर पहुंचे।

यह दौरा वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, शोध अवसंरचना को सुदृढ़ करने और नवाचार को प्रोत्साहित करने की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।

आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने एएनआरएफ़ प्रमुख का स्वागत करते हुए कहा कि एएनआरएफ़ की पहलें भारत में टिकाऊ और सशक्त शोध वातावरण के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि संस्थान बहुविषयक शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर डॉ. कल्याणरामन ने कहा कि आईआईटी मंडी जैसे संस्थान देश में शोध के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां अंतःविषय सहयोग और राष्ट्रीय हितों पर आधारित परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि एएनआरएफ़ का उद्देश्य संस्थानों को बेहतर फंडिंग, सहयोग और नवाचार के अवसर प्रदान कर उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाना है।

दौरे के दौरान एएनआरएफ़ प्रमुख ने संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत संवाद किया। उन्होंने शोध तंत्र को मजबूत करने, फंडिंग योजनाओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर विशेष जोर दिया, ताकि मूलभूत विज्ञान और समाजोपयोगी नवाचारों में तेजी लाई जा सके।

दौरे का मुख्य आकर्षण “एएनआरएफ़ विजन: एंपावरिंग इंडिया ऐज ए रिसर्च एंड इनोवेशन पावर” विषय पर आयोजित संस्थान कोलोकीयम रहा, जिसमें भारत को वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने की दिशा में एएनआरएफ़ की रणनीति और दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया।

इस दौरान आईआईटी मंडी के संकाय सदस्यों ने एएनआरएफ़ समर्थित परियोजनाओं और बहुविषयक शोध क्षेत्रों पर प्रस्तुतियां दीं। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा, बायोमेडिकल विज्ञान, ऊर्जा भंडारण, क्वांटम भौतिकी, मल्टीमोडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रिसिजन एग्रीकल्चर और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल रहे।

आईआईटी मंडी के डीन (एसआरआईसी) डॉ. श्याम कुमार मसकापल्ली ने कहा कि राष्ट्रीय शोध नेतृत्व के साथ इस प्रकार की सहभागिता संस्थान के विकास के लिए उत्प्रेरक का कार्य करती है और शोध योगदान को और अधिक सशक्त बनाती है।

क्षेत्रीय समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संस्थान द्वारा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न प्रमुख संस्थानों के साथ एक गोलमेज बैठक का भी आयोजन किया गया।

दौरे के दौरान डॉ. कल्याणरामन ने आईआईटी मंडी की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और शोध केंद्रों का अवलोकन किया तथा विकसित हो रही तकनीकों के व्यावसायीकरण की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

यह दौरा आईआईटी मंडी और एएनआरएफ़ के बीच मजबूत समन्वय का प्रतीक बनकर उभरा है, जो भारत को वैश्विक शोध एवं नवाचार नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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