मालविका पठानिया बनीं भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर न्यास (इंटैक) की उपाध्यक्ष

 मालविका पठानिया बनीं भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर न्यास (इंटैक) की उपाध्यक्ष 


नूरपुर : विनय महाजन /

 दिल्ली में 17 अप्रैल 2026 को आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर न्यास (इंटैक) की संचालन परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से हिमाचल प्रदेश जिला कांगड़ा के जसूर ( नूरपुर ) की निवासी मालविका पठानिया को उपाध्यक्ष चुना गया।उनके नाम का प्रस्ताव अध्यक्ष अशोक ठाकुर द्वारा बैठक मे रखा गया जिसे परिषद ने एकमत से अनुमोदित किया।इस अवसर पर अध्यक्ष अशोक जयराज ठाकुर ने कहा कि संगठन के साथ पिछले 42 वर्षों से जुड़ी मालविका पठानिया का अनुभव संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि उनके जमीनी स्तर पर किए गए कार्य ग्रामीण भारत के मूल्यों को सामने लाने के साथ-साथ इंटैक के कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद करेंगे, जिससे विकसित भारत के विजन को साकार किया जा सकेगा। इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष एस के मिश्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा सेवानिवृत् ने कहा कि मालविका पठानिया संगठन से उनके जुड़ने से पहले से ही सक्रिय रही हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण—चाहे वह मूर्त हो या अमूर्त—में उनके योगदान को अमूल्य बताया। इस अवसर पर मालविका पठानिया ने कहा कि वे देश के श्रेष्ठ संरक्षण विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए स्वयं को सम्मानित महसूस कर रही हैं। उन्होंने उन पर जताए गए विश्वास के लिए सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे अध्यक्ष अशोक ठाकुर के साथ मिलकर भारत की धरोहर के संरक्षण के कार्य को देश के दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने सदस्य सचिव रविंदर सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा, सेवानिवृत्त का भी मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद किया।बैठक में अन्य नियुक्तियों के तहत  मणिकोंडा और  धर्मेंद्र कुंवर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नामित किया गया, जबकि हर्षा भोगल को वित्त समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया।

बैठक का समापन अध्यक्ष के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। क्षेत्र के लोगों ने मालविका पठानिया के इस चयन पर खुशी जताते हुए इसे नूरपुर के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। नूरपुर मे ऐतिहसिक भारत सरकार के पुरातत्व विभाग की सीमा में स्थित श्री कृष्ण के मंदिर की दीवारों पर राजस्थान शैली पर चित्रण की गई खंडित मूर्तियों को उन्होंने आधुनिक रूप से सजाया और इतना नहीं मोहम्मद गजनबी जाते जाते किले की दीवारों पर स्थित खंडित कला फोटो को भी खंडित कर गए थे उनको भी उन्होंने काफी दशक पहले आधुनिक रूप दिया था जब पुरातत्व विभाग इतना नूरपुर में एक्टिव नहीं थाl समाज सेवा में मानव का पठानिया का काफी योगदान माना जाता हैl

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