चम्बा में संकटग्रस्त स्तनधारियों की निगरानी पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
चम्बा में संकटग्रस्त स्तनधारियों की निगरानी पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
चंबा : जितेन्द्र खन्ना /
हिमाचल प्रदेश के चम्बा स्थित बचत भवन में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण कोलकाता और हिमाचल प्रदेश वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। भारतीय हिमालयी क्षेत्र के संकटग्रस्त स्तनधारी जीवों की निगरानी विषय पर आधारित इस कार्यशाला में चम्बा वन वृत्त के अधिकारियों और फ्रंटलाइन स्टाफ ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वन अरण्यपाल चम्बा राकेश कुमार ने किया। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण में साक्ष्य- आधारित निर्णय और वन्य जीव फॉरेंसिक की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वन्यजीव अपराधों को रोकने और जैव विविधता की सुरक्षा में फ्रंटलाइन स्टाफ की भूमिका सबसे अहम है। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डीएफओ वाइल्डलाइफ डॉ. कुलदीप सिंह जमवाल ने वन विभाग, अनुसंधान संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच आपसी सहयोग को संरक्षण के लिए अनिवार्य बताया। वहीं, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. बिपन राठौर ने राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर चम्बा के पारिस्थितिक तंत्र को बचाने की अपील की। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ललित कुमार शर्मा ने एनएचएमएस द्वारा वित्त पोषित परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने आगाह किया कि हिमालयी क्षेत्रों में कई स्तनधारी प्रजातियों की आबादी तेजी से घट रही है, जिसके लिए तत्काल वैज्ञानिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। डॉ. अमीरा शरीफ ने वन्यजीव गलियारों और परिदृश्य जुड़ाव के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. विनीत राणा ने चम्बा में चल रही फील्ड गतिविधियों और निगरानी के उपकरणों की जानकारी दी। डॉ. रितम दत्ता ने वन्यजीव संरक्षण में जीआईएस और रिमोट सेंसिंग के उपयोग पर व्याख्यान दिया। सत्र के दौरान शोधकर्ता अंकित कश्यप और संजय शर्मा द्वारा प्रतिभागियों को फील्ड में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें कैमरा ट्रैप लगाना, जीपीएस और कंपास का उपयोग, ट्रेल सर्वे और वनस्पति नमूनाकरण जैसी तकनीकें सिखाई गईं ताकि वन्यजीवों का डेटा सटीक तरीके से एकत्र किया जा सके। इस कार्यशाला में चम्बा सर्कल के 50 से अधिक वन कर्मियों ने भाग लिया।


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