2026-27 बजट में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया : डॉ. नरेश बंसल - Smachar

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2026-27 बजट में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया : डॉ. नरेश बंसल

 2026-27 बजट में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया : डॉ. नरेश बंसल

कहा आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार केंद्रीय बजट रविवार के दिन प्रस्तुत किया


बोले मोदी सरकार एवं राज्य सरकार का विजन दुर्गम मार्गों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने

कहा उत्तराखंड के बजट से हिमाचल की कांग्रेस सरकार बहुत पीछे

धर्मशाला

उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल धर्मशाला में पत्रकार सम्मेलन में कहा कि बजट 2026-27 में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। रेलवे, विमानन और जल परिवहन क्षेत्रों के लिए कई बड़ी और दूरगामी घोषणाएं की गई हैं, जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत कम करना और आर्थिक विकास को गति देना है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट देश की आर्थिक मजबूती, युवाओं के रोजगार, किसानों की आय वृद्धि और महिलाओं के सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह बजट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और मजबूत करने वाला है तथा इसमें आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। सांसद डॉ. नरेश बंसल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 को शानदार, दमदार, आम आदमी की सोच वाला व विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने वाला बताया है। डॉ. नरेश बंसल ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण रहा, क्योंकि आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार केंद्रीय बजट रविवार के दिन प्रस्तुत किया गया। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट रहा, जिससे वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का यह 15वां बजट है। भाजपा-नीत एनडीए सरकार के कार्यकाल में निरंतर आर्थिक विकास और नियंत्रित महंगाई देखने को मिली है। 

डॉ. बंसल ने कहा कि आमजन के कल्याण को ध्यान में रखते हुए यह केंद्रीय बजट तीन संकल्पों से सुसज्जित है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया, जिसका कुल आकार 53.5 लाख करोड़ रुपये है, जबकि पिछले वर्ष का बजट 50.65 लाख करोड़ रुपये का था।

डॉ. नरेश बंसल ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2021-22 में किए गए अपने वादे को पूरा किया है, जिसके तहत वर्ष 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को GDP के 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया था। वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा GDP का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान था जो बजट अनुमान के अनुरूप है। वर्ष 2026-27 में यह और घटकर GDP का 4.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। सरकार ने FY27 के लिए कर्ज-GDP अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। FY27 में 11.7 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया जाएगा। 16वें वित्त आयोग की 41 प्रतिशत हिस्सेदारी की सिफारिश को भी स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि रसायन और उर्वरक सब्सिडी: ₹1,77,061 करोड़, कृषि और किसान कल्याण: ₹1,40,528 करोड़ तथा शिक्षा मंत्रालय पर ₹1,39,289 करोड़ ओर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण: ₹1,06,530 करोड़ का प्रवाधान किया गया है।

डॉ. बंसल ने कहा कि गरीब कल्याण के संकल्प के साथ तैयार किया गया यह बजट शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास को हर घर तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता को दोहराता है। यह बजट ऐसे भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर है, जहाँ अवसर सभी की पहुँच में होंगे। पिछड़ों, दलितों और वंचित वर्गों के लिए विशेष योजनाओं का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि विकास की इस यात्रा में कोई भी पीछे न छूटे। महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. नरेश बंसल ने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट में उल्लेख किया है कि भारत में वर्ल्ड क्लास ट्रैकिंग की जब भी चर्चा होगी, उत्तराखंड का नाम शीर्ष पर होगा। मोदी सरकार एवं राज्य सरकार का विजन दुर्गम मार्गों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने का है। यह केवल एडवेंचर टूरिज्म नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का एक आध्यात्मिक अनुभव भी है। उन्होंने कहा कि यह बजट और इससे जुड़ी योजनाएँ देश की बहनों को ‘आर्थिक शक्ति’ बनाने के लिए समर्पित हैं।डॉ. नरेश बंसल ने विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने वाले इस विकासोन्मुख बजट के लिए वित्त मंत्री, प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त किया।

केंद्रीय बजट 2026 में रेलवे को लेकर एक अहम फैसला लेते हुए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की गई है। इन कॉरिडोरों के जरिए देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों को तेज और आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि बजट 2026 में छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के लिए सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का ग्रोथ फंड लाने का ऐलान किया है। इससे उद्यमियों को अपने कारोबार के विस्तार में मदद मिलेगी। इसके अलावा, टेक्सटाइल सेक्टर को भी विशेष प्रोत्साहन देने की बात कही गई है, जिससे रोजगार और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए सरकार की गरीब-समर्थक नीतियों के माध्यम से 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। 

सांसद बंसल ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में महिला सशक्तिकरण और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए देश के प्रत्येक जिले में एक महिला/बालिका छात्रावास स्थापित करने की बड़ी घोषणा की है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की छात्राओं को सुरक्षित आवास प्रदान करेगी, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ) शिक्षा में सहायता मिलेगी। लकपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, सरकार महिलाओं को ऋण आधारित आजीविका से उद्यम मालिक बनने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करने की योजना बना रही है।

उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड हिमाचल से आगे चल रहा है। हिमाचल की सरकार को उत्तराखंड से सीखना चाहिए। सरकार की सोच और नीति सही नही है। उत्तराखंड के बजट से हिमाचल बहुत पीछे है। उन्होंने कहा जब उत्तराखंड प्रदेश बना तो हमने हिमाचल प्रदेश को अपना आदर्श माना, परन्तु आज हिमाचल की कांग्रेस सरकार को केंद्र से राहत पैकेज व ऋण लेने के बाद आर्थिक तंगी का रोना रो रही है।

इस मौके पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राकेश शर्मा, जिला कांगड़ा भाजपा अध्यक्ष सचिन शर्मा, प्रदेश भारतीय जनता पार्टी प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी एडवोकेट विश्व चक्षु व जिलाभाजपा महामंत्री दवेंद्र कोहली मौजूद रहे।



सांसद  डॉ. नरेश बंसल ने हिमाचल की कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक ओर हिमाचल प्रदेश सरकार गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ उत्तराखंड ने बीते दो दशक में अपनी अर्थव्यवस्था को दोगुना कर लिया है। उन्होंने कहा हिमाचल प्रदेश सरकार का खजाना खाली होने की कगार पर है। इस बीच केंद्र सरकार ने राजस्व घाटा अनुदान (RDG) देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार के सामने राज-काज चलाने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हिमाचल प्रदेश के वित्त विभाग के मुताबिक, 2026-27 में राज्य सरकार 13,000 करोड़ रुपये कर्ज व ब्याज के तौर पर चुकाएगी, जबकि सुक्खू सरकार ने इस वित्त वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बनाई है। मतलब साफ है कि सरकार जितना कर्ज ले रही है, उससे ज्यादा देनदारी है। उन्होंने कहा कि सुक्खू ने हिमाचल को बर्वाद कर दिया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र का बजट पर्यावरण और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में टिकाऊ पर्वतीय ट्रेल्स विकसित करेगी। इसका मकसद प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखते हुए पर्यटकों को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं देना है। इसके अलावा पूर्वी घाट की अराकू घाटी और पश्चिमी घाट के पुडिगई मलै क्षेत्र में भी ऐसे ट्रेल्स बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा बजट में पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए एक खास पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की गई है। देश के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूर गाइड्स को ट्रेनिंग दी जाएगी. यह 12 हफ्तों का मानकीकृत कोर्स होगा, जो हाइब्रिड मोड में IIM के सहयोग से कराया जाएगा. इस कदम से भारत आने वाले सैलानियों को बेहतर अनुभव मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार ने नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी को अपग्रेड कर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी बनाने का ऐलान किया है। यह संस्थान सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग को मजबूत करेगा। इससे युवाओं को बेहतर रोजगार और पर्यटन उद्योग को कुशल मैनपावर मिलेगी।

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