“आत्मविजय ही सच्ची शिव साधना – पहले स्वयं को बदलो, फिर जग सुधारो” स्वामी विकासानंद - Smachar

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“आत्मविजय ही सच्ची शिव साधना – पहले स्वयं को बदलो, फिर जग सुधारो” स्वामी विकासानंद

 “आत्मविजय ही सच्ची शिव साधना – पहले स्वयं को बदलो, फिर जग सुधारो” स्वामी विकासानंद


 नूरपुर : विनय महाजन /

नूरपुर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की शाखा नूरपुर आश्रम में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भव्य सत्संग एवं भजन संकीर्तन का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया और आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त की।

सत्संग का शुभारंभ वेद मंत्रों एवं ‘ॐ नमः शिवाय’ के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ। तत्पश्चात परम पूज्य गुरुदेव आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी विकासानंद जी ने उपस्थित साधकों को शिवरात्रि के आध्यात्मिक रहस्य से अवगत कराया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान शिव की समाधि हमें एक शाश्वत सत्य सिखाती है—सबसे बड़ी क्रांति संसार को बदलने में नहीं, बल्कि स्वयं को बदलने में है।

स्वामी ने कहा कि जो व्यक्ति अपने भीतर की काम-वासना, क्रोध, लोभ और अहंकार से पराजित है, वह समाज को सही दिशा नहीं दे सकता। यदि मन ही चंचल और दिशाहीन हो तो बाहरी उपलब्धियां भी स्थायी सुख नहीं दे सकतीं। इसलिए शिव का मार्ग आत्मविजय का मार्ग है। पहले स्वयं को अनुशासन, संयम और सत्य के पथ पर स्थापित करें, तब हमारे प्रत्येक कर्म में शक्ति और प्रभाव स्वतः आ जाएगा। उन्होंने समझाया कि शिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन का अवसर है।

स्वामी ने कहा कि भगवान शिव की तपस्या, मौन और समाधि यह संदेश देती है कि जब मन स्थिर होता है, तभी सही निर्णय और सच्चा नेतृत्व संभव होता है। आत्मसंयम ही वास्तविक शक्ति है। जब व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त कर लेता है, तब उसका प्रत्येक कदम समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आंदोलन बन जाता है। यही शिव का संदेश है—पहले आत्मविजय, फिर जग सुधार।कार्यक्रम में भक्ति रस की अविरल धारा तब प्रवाहित हुई जब स्वामी रमन जी ने शिव महिमा से ओतप्रोत भजनों का गायन किया। “शिव शंकर को जिसने पूजा…” एवं अन्य भजनों ने उपस्थित संगत को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालु झूमते हुए हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण को शिवमय बना रहे थे।अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों को समाज के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए संस्थान का आभार व्यक्त किया। इस प्रकार नूरपुर आश्रम में मनाई गई शिवरात्रि आत्मजागरण और आत्मपरिवर्तन का प्रेरक संदेश देकर संपन्न हुई।

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