एक महीने के बेटे के साथ पत्नी ने दी शहीद पति को श्रद्धांजलि

एक महीने के बेटे के साथ पत्नी ने दी शहीद पति को श्रद्धांजलि

चुरू जिले के रतनगढ़ के गांव में बुधवार को भारतीय वायुसेना के जगुआर फाइटर जेट के क्रैश होने में शहीद होने वाले हरियाणा के रोहतक के रहने वाले पायलट लोकेंद्र सिंह सिंधु को आज गमगीन माहौल में अंतिम विदाई दी गई। पत्नी डॉक्टर सुरभि सिंधु ने अपने एक महीने के बेटे के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी और तिरंगा माथे से लगाकर सैल्यूट किया। लोकेन्द्र अपने पीछे डॉक्टर पत्नी, एक महीने के बेटे, बहन, माता-पिता और दादा-दादी को छोड़ गए हैं। उनके भाई बड़े ज्ञानेंद्र ने कहा कि उन्होंने देश के लिए वो सर्वोच्च बलिदान दिया है जो कोई सैनिक कर सकता है। वे अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए शहीद हुए। उन्होंने आम नागरिकों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवाई। मेरे परिवार और मुझे उन पर गर्व है। उन्होंने बताया कि लोकेंद्र 10 दिन पहले 30 जून को घर पर थे। उस दिन परिवार में उनके बेटे के जन्म की खुशी में एक समारोह रखा गया था। वे 1 जुलाई को ड्यूटी पर वापस लौटे थे। हादसे से महज तीन घंटे पहले उनका परिवार से मैसेज पर बात हुई थी और उससे एक रात पहले वीडियो कॉल पर बात हुई थी।लोकेंद्र सिंधु तीन भाई-बहन है, जिसमें बड़ी बहन अंशी भी एयरफोर्स से रिटायर होकर एक कंपनी में नौकरी करती है। बड़ा भाई ज्ञानेंद्र भी कंपनी में इंजीनियर है और लोकेंद्र एयरफोर्स में था। लोकेंद्र के पिता जोगेंद्र सिंधु रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड सुपरिटेंडेंट हैं और लोकेंद्र की पत्नी सुरभि सिंधु डॉक्टर हैं। ज्ञानेंद्र सिंह सिंधु ने बताया कि लोकेंद्र पढ़ाई में तेज था। 12वीं पास करते ही एनडीए की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली थी। 2015 में उसे कमीशन मिला था। ज्ञानेंद्र ने बताया कि विमान में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण वह घनी आबादी वाले इलाके की ओर गिरने लगा। दोनों पायलटों ने किसी तरह विमान को उस इलाके से दूर ले जाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान विमान जमीन के बहुत करीब आ गया और दोनों पायलट विमान से बाहर नहीं निकल पाए और हादसे में उनकी जान चली गई। भारतीय वायुसेना ने दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की है। जगुआर फाइटर जेट ने श्रीगंगानगर के पास सूरतगढ़ एयरबेस से उड़ान भरी थी और जोरदार धमाके के साथ जमीन पर गिरते ही विमान के टुकड़े हो गए और उसमें आग लग गई।

शाम 6 बजे शीला बाईपास चौक स्थित राम बाग श्मशान घाट में जय हिंद के नारों के साथ राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।


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