मनरेगा कानून की बहाली को लेकर 12 फरवरी को खंड स्तर पर प्रदर्शन — सीटू
मनरेगा कानून की बहाली को लेकर 12 फरवरी को खंड स्तर पर प्रदर्शन — सीटू
मंडी : अजय सूर्या /
मनरेगा कानून की बहाली और नए जीरामजी कानून के विरोध में 12 फरवरी को प्रदेश भर में खंड (ब्लॉक) स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। यह निर्णय सीटू से संबद्ध मनरेगा व भवन एवं अन्य सन्निर्माण मजदूर यूनियन की राज्य कमेटी की बैठक में लिया गया, जो मंडी में राज्य अध्यक्ष जोगिंदर कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुई।
बैठक में सीटू के राज्य अध्यक्ष विजेंदर मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सहित अजय दुल्टा, राजेश शर्मा, गुरदास वर्मा, गोपेंद्र शर्मा, रामचंद, नरेंद्र कुमार, चमन लाल, संतोष कुमार, केवल कुमार, सुनील मेहता, राजेंद्र कुमार, निरंजन शर्मा, आशीष कुमार, जीवन नेगी, ममता, शीला, बलबीर और प्रदीप कुमार सहित अनेक पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून को समाप्त कर लाए गए नए जीरामजी कानून के खिलाफ व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा। इसके तहत मनरेगा कानून की बहाली और चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग को लेकर 12 फरवरी को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन होंगे। इससे पहले 20 जनवरी से गांव-गांव जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, जिसमें मनरेगा मजदूरों की बैठकों के साथ पर्चा वितरण कर एक लाख से अधिक घरों तक दस्तक दी जाएगी।
यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार नए कानून को मजदूर हितैषी बताकर प्रचारित कर रही है, जबकि हकीकत में रोजगार की गारंटी खत्म कर दी गई है और ग्राम पंचायतों में कार्यों के निर्धारण का अधिकार केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिया है।
बैठक में राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। बताया गया कि बोर्ड के पास एक लाख से अधिक मजदूरों की लगभग 500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता लंबे समय से लंबित है। चालू वित्त वर्ष में अब तक केवल 30 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं, जिनमें से 12 दिसंबर को सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर मंडी में मजदूरों को इकट्ठा करने के लिए 10 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इसके बाद एक माह बीत जाने पर भी कोई नई वित्तीय सहायता जारी नहीं की गई। नेताओं ने आरोप लगाया कि बोर्ड के धन का दुरुपयोग कर कांग्रेस पार्टी की रैलियां करवाई जा रही हैं।
बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि वर्ष 2022 से पहले जमा किए गए मजदूरों के दावों पर ई-केवाईसी की अनिवार्यता लागू न की जाए, क्योंकि यह नियम उसी वर्ष बनाया गया था। साथ ही मनरेगा में मास्टर रोल के आधार पर काम करने वाले मजदूरों तथा फोरलेन व हाइडल परियोजनाओं में पहले कार्य कर चुके निर्माण मजदूरों के पुराने क्लेमों की अनावश्यक वेरिफिकेशन पर भी आपत्ति जताई गई।
इसके अतिरिक्त बीआरओ, राष्ट्रीय राजमार्गों पर कार्यरत मजदूरों और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता के आधार पर संगठित करने का निर्णय लिया गया, क्योंकि प्रदेश में निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर कार्यरत हैं।
बैठक में राजस्थान में 6, 7 और 8 फरवरी को होने वाले निर्माण फेडरेशन के राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए हिमाचल प्रदेश से चार प्रतिनिधियों का चयन किया गया। इनमें हमीरपुर से जोगिंदर कुमार, शिमला से अमित कुमार, मंडी से भूपेंद्र सिंह और हमीरपुर से संतोष कुमार शामिल हैं, जबकि प्रेम गौतम केंद्रीय कमेटी के पदाधिकारी के रूप में सम्मेलन में भाग लेंगे।


कोई टिप्पणी नहीं