सुक्खू सरकार के अंतर्विरोधों ने हिमाचल को अराजकता की ओर धकेला, मंत्रियों की बयानबाजी से प्रशासनिक ढांचा ध्वस्त: त्रिलोक कपूर
सुक्खू सरकार के अंतर्विरोधों ने हिमाचल को अराजकता की ओर धकेला, मंत्रियों की बयानबाजी से प्रशासनिक ढांचा ध्वस्त: त्रिलोक कपूर
उपमुख्यमंत्री की धमकी और विक्रमादित्य के 'क्षेत्रवाद' ने देवभूमि की छवि बिगाड़ी।
पेंशन और वेतन के लाले, लेकिन मित्रों को कैबिनेट रैंक की रेवड़ियाँ बाँटने में मशगूल मुख्यमंत्री।
"धीये तू कन कर, नुऐं तू सुन" की तर्ज पर चल रही सुक्खू सरकार का पतन निश्चित।
पालमपुर
भारतीय जनता प्रदेश के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने आज सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश इस समय 'संवैधानिक संकट' और 'प्रशासनिक विफलता' के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का अपने मंत्रिमंडल पर से इकबाल खत्म हो चुका है, जिसके कारण मंत्री बेलगाम होकर न केवल अधिकारियों को धमका रहे हैं, बल्कि दूसरे राज्यों के विरुद्ध जहर उगलकर देश की एकता को भी चुनौती दे रहे हैं।
त्रिलोक कपूर ने कहा, "यह बेहद चिंताजनक है कि उपमुख्यमंत्री सरेआम अधिकारियों को 'रात के अंधेरे में निपटाने' की धमकी देते हैं। वहीं, मंत्री विक्रमादित्य सिंह अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार के अधिकारियों को अयोग्य बताकर क्षेत्रवाद की राजनीति कर रहे हैं। NHAI के अधिकारियों को प्रताड़ित करने वाले मंत्री का विक्रमादित्य पर कटाक्ष करना यह सिद्ध करता है कि इस सरकार में कानून का नहीं, बल्कि 'जंगलराज' का शासन है।"
कपूर ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि आज प्रदेश का हर नागरिक ₹1 लाख से अधिक के कर्ज में डूबा है। कर्मचारियों को वेतन और पेंशन के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री खजाने का मुंह केवल अपने 'खास मित्रों' के लिए खोले हुए हैं। यह सरकार आज युवाओं को नौकरियां देने के बजाय संस्थानों को बंद करने में रिकॉर्ड बना रही है।
कांगड़ा की एक कहावत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "धीये तो कन कर, नुऐं तू सुन"। आज सुक्खू मंत्रिमंडल में आधे मंत्री मुख्यमंत्री की कार्यशैली से इतने खफा हैं कि वे सीधे बोलने के बजाय अधिकारियों के माध्यम से कटाक्ष कर रहे हैं। सरकार के भीतर चल रही यह 'शीत युद्ध' की स्थिति प्रदेश के विकास को लील रही है।
त्रिलोक कपूर ने स्पष्ट किया कि जिस सरकार में केवल 'मित्र' सुखी हों और आम जनता महंगाई व भेदभाव से त्रस्त हो, ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, "सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार अपने ही अंतर्विरोधों के बोझ से भरभरा कर गिर जाएगी। भाजपा जनता के हितों की रक्षा के लिए चुप नहीं बैठेगी और इस कुशासन के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी।"


कोई टिप्पणी नहीं