सरकारी संपत्ति का खेल – महिला मंडल भवन में सीमेंट कब आया, किसने रखा? जांच के बिना राज़ नहीं खुलेगा

 सरकारी संपत्ति का खेल – महिला मंडल भवन में सीमेंट कब आया, किसने रखा? जांच के बिना राज़ नहीं खुलेगा

लाड़थ पंचायत में सीमेंट कांड! प्रधान–उपप्रधान–सदस्य के बयान उल्टे, दाल में काला या पूरी दाल ही काली?


50-60 सीमेंट के बैग बरबाद, लाखों का नुकसान – पंचायत प्रधान की लापरवाही या अंदरखाते गड़बड़ी

फतेहपुर : बलजीत ठाकुर /

विकास खंड फतेहपुर की पंचायत लाड़थ में भारी लापरवाही और संदिग्ध कारगुजारी का मामला सामने आया है। पंचायत घर में रखे गए 50-60 सरकारी सीमेंट के बैग पूरी तरह पत्थर में तब्दील हो गए। इस खुलासे ने पंचायत के कामकाज पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, यह सीमेंट पुराने पंचायत घर में करीब एक साल से पड़ा हुआ था। बाद में यह भवन मौखिक तौर पर महिला मंडल को सौंप दिया गया। लेकिन सवाल यह है कि सरकारी सीमेंट महिला मंडल के कब्जे वाले भवन में आखिर पहुंचा कैसे?


महिला मंडल प्रधान साहनी देवी का कहना है कि भवन उन्हें पंचायत ने मौखिक रूप से दिया था और तब से उसकी देखरेख वही कर रही हैं। लेकिन उन्होंने माना कि सीमेंट पंचायत सचिव ने रखा था, जबकि ताले की चाबी महिला मंडल के पास ही है। इससे पूरे मामले में और ज्यादा संदेह गहराता जा रहा है।


मौके के दौरान पाया गया कि सीमेंट पूरी तरह खराब हो चुका है और पंचायत प्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर आपस में सुर नहीं मिला पा रहे। पंचायत सदस्य ने आरोप लगाया कि पंचायत प्रधान की लापरवाही से सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा—


“मेरे पास 10 दिसंबर 2024 का फोटो सबूत है, जिसमें यह सीमेंट पहले ही पत्थर बन चुका था। अगर गहन जांच हो तो लाखों के घपले सामने आ सकते हैं।”


वहीं उपप्रधान संजय कुमार ने साफ कहा कि—


 हमें कोई जानकारी नहीं। प्रधान अपनी मनमर्जी से काम करती है।”


प्रधान का बयान बाकी सब से अलग है। उन्होंने दावा किया कि यह सीमेंट सिर्फ 2-3 महीने पहले आया था, बारिश की वजह से इसे इस्तेमाल नहीं किया जा सका। लेकिन पंचायत सदस्य और अन्य लोगों के मुताबिक करीब एक साल से कोई नया सीमेंट आया ही नहीं।


गौरतलब है कि पंचायत का सुरक्षित गोदाम नकोदर में है, तो सवाल यह भी उठता है कि सरकारी सीमेंट को पुराने जर्जर पंचायत घर में क्यों रखा गया?


इस पूरे मामले पर जब विकास खंड अधिकारी से फोन पर संपर्क करना चाहा गया तो उन्होंने कॉल तक रिसीव करना जरूरी नहीं समझा। इससे साफ है कि मामले में दाल ही नहीं, पूरी दाल-रोटी काली है।


पंचायत वासियों और प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि मामले की गहन जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ।

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