चार साल पुराने कथित मामले पर उठे सवाल, बीडीओ बोले-जांच पूरी होने तक इसे घोटाला नहीं कह सकते
चार साल पुराने कथित मामले पर उठे सवाल, बीडीओ बोले-जांच पूरी होने तक इसे घोटाला नहीं कह सकते
(नूरपुर:-विनय महाजन)
नूरपुर में पंचायत समिति से जुड़े करीब चार वर्ष पुराने कथित वित्तीय अनियमितता के मामले को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। चुनाव नजदीक आने के दौरान मामला उठाए जाने पर यह सवाल भी सामने आया है कि यदि कथित अनियमितता लगभग चार वर्ष पहले हुई थी तो उस समय संबंधित विभाग के ध्यान में यह मामला क्यों नहीं आया।
मामले को लेकर खंड विकास अधिकारी नूरपुर अशोक कुमार से जब पूछा गया कि उस समय विभागीय स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली और अब मामला सामने क्यों आया, तो उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले इसे घोटाला नहीं कहा जा सकता। वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
उन्होंने कहा कि यदि उस समय कोई अनियमितता हुई थी तो उसे उसी समय उजागर किया जाना चाहिए था, ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो।
ऑडिट में मामला सामने क्यों नहीं आया?
मामले में विभागीय ऑडिट को लेकर भी सवाल उठाए गए। पूछा गया कि यदि संबंधित रिकॉर्ड का नियमित ऑडिट होता है तो कथित अनियमितता उस समय ऑडिट में क्यों नहीं पकड़ी गई।
इस पर बीडीओ अशोक कुमार ने कहा कि संबंधित रिकॉर्ड का ऑडिट होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किराया जमा हो जाता है तो उसे सामान्य तौर पर अलग से नहीं देखा जाता, लेकिन यदि किराया जमा नहीं होता है तो ऑडिट के दौरान इसका पता चल जाता है।
अखिल बक्शी के आरोपों पर जांच शुरू
बीडीओ से यह भी पूछा गया कि अखिल बक्शी ने नूरपुर में बनी पंचायत समिति में कथित घोटाले और दुकानों के आवंटन में बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। इस पर अशोक कुमार ने बताया कि उनके कार्यालय में इस संबंध में शिकायत पत्र प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि शिकायत के आधार पर तीन सदस्यीय उच्चाधिकारियों की कमेटी गठित की गई है। कमेटी द्वारा मामले की जांच की जा रही है और उसे रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर
बीडीओ ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदारी तथा किसी संभावित अनियमितता की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
चार साल पुराने मामले के अब सामने आने से विभागीय निगरानी और ऑडिट व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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