लगभग 110 किलोमीटर तक धुआं फैलाती रही एचआरटीसी की बस, प्रदूषण पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ ने उठाए सवाल
लगभग 110 किलोमीटर तक धुआं फैलाती रही एचआरटीसी की बस, प्रदूषण पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ ने उठाए सवाल
(नूरपुर:-विनय महाजन)
नूरपुर सड़क पर अपने निजी वाहन से यात्रा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रदूषण प्रमाण पत्र रखना अनिवार्य होता है। वाहन की जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाता है और इसके अभाव में पुलिस द्वारा चालान किया जा सकता है। वहीं, दूसरी ओर सरकारी परिवहन निगम की बसों से निकलने वाला प्रदूषण भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।गत दिवस पठानकोट से पालमपुर जा रही पथ परिवहन निगम की एक बस करीब 110 किलोमीटर तक काला धुआं छोड़ते हुए चलती रही। बस से निकलने वाले धुएं के कारण सड़क पर पीछे चल रहे वाहन चालक और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस घटना ने परिवहन निगम की बसों के रखरखाव और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ के निदेशक राजेश सिंह पठानिया ने कहा कि हाल ही में सड़कों पर तकनीकी खराबी के कारण खड़ी रहने वाली कई बसों के समाचार सामने आए हैं। ऐसी घटनाओं से परिवहन निगम की बसों के रखरखाव को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न होती हैं। पठानकोट से पालमपुर जा रही बस इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लंबे समय से नई बसें सड़कों पर उतारने का दावा कर रही है, लेकिन इसके बावजूद लंबे रूटों पर पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली बसें संचालित होती दिखाई दे रही हैं। ऐसी बसें न केवल वातावरण को प्रदूषित करती हैं, बल्कि यात्रियों और आम जनता के स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय बन सकती हैं।
राजेश सिंह पठानिया ने परिवहन निगम से मांग की कि अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाली बसों का संचालन बंद किया जाए। निगम की वर्कशॉप में बसों का नियमित और उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि सड़क पर बसों के खराब होने और प्रदूषण फैलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।उन्होंने कहा कि आम वाहन चालकों से प्रदूषण प्रमाण पत्र की मांग की जाती है, इसलिए सरकारी परिवहन वाहनों के प्रदूषण मानकों की भी प्रभावी ढंग से जांच होनी चाहिए

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें