प्रभु प्रेम ही जीवन का शाश्वत आधार : स्वामी जगदीशानंद
प्रभु प्रेम ही जीवन का शाश्वत आधार : स्वामी जगदीशानंद
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा बौड़ आश्रम नूरपुर में आध्यात्मिक सत्संग का आज एक आयोजन अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति-भाव के साथ संपन्न हुआ।इस कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु भाई सुखदेव द्वारा प्रभु चरणों में मंगल प्रार्थना एवं भजन-गायन से किया गया। उन्होंने भावपूर्ण स्वर में गाया— "प्रभु का प्यार मिल जाए , जिसे एक बार जीवन में, वो बंदे हो नहीं सकते कभी लाचार जीवन में।" भजनों के माध्यम से उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रभु प्रेम की महिमा का अनुभव कराया l इसके उपरांत आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी जगदीशानंद ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में प्रभु प्रेम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में प्रेम दो प्रकार का होता है— एक नश्वर संसार से और दूसरा अविनाशी परमात्मा से। संसार का प्रेम शरीर एवं स्वार्थ तक सीमित होता है, जबकि प्रभु का प्रेम आत्मा से जुड़ा होता है और इस लोक ही नहीं, परलोक में भी जीव का साथ निभाता है।स्वामी जी ने अनेक प्रेरक उदाहरणों एवं भक्तों के जीवन प्रसंगों के माध्यम से समझाया कि जब मनुष्य परमात्मा से सच्चा संबंध स्थापित कर लेता है, तब उसके जीवन से भय, चिंता और असुरक्षा स्वतः समाप्त होने लगती है। प्रभु प्रेम व्यक्ति के जीवन में धैर्य, करुणा, संतोष एवं आत्मविश्वास का संचार करता है। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति केवल बाहरी कर्मकांडों से नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान द्वारा प्रभु का प्रत्यक्ष अनुभव करने से पूर्ण होती है।प्रवचनों के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं ने विश्व शांति एवं समस्त मानवता के कल्याण की मंगलकामना के लिए सामूहिक ध्यान साधना की। कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक वातावरण का भरपूर लाभ प्राप्त किया तथा नियमित सत्संग, साधना और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। अंत में सभी भक्तों ने प्रभु चरणों में कृतज्ञता अर्पित करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

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