सावन शुरू... नागचला में पूरे महीने लगेगा देसी घी के परांठों का अनोखा भंडारा
सावन शुरू... नागचला में पूरे महीने लगेगा देसी घी के परांठों का अनोखा भंडारा
10 साल से जारी अनोखी परंपरा... जहां भंडारे में दिनभर मिलते हैं सिर्फ देसी घी के परांठे
अजय सूर्या मण्डी।। सावन माह की शुरुआत के साथ ही मंडी जिले के नागचला स्थित हनुमान मंदिर के समीप एक बार फिर देसी घी के परांठों का अनोखा भंडारा शुरू हो गया है। यह भंडारा पूरे सावन माह लगातार चलेगा, जहां सुबह से लेकर देर शाम तक आने वाले हर श्रद्धालु, राहगीर और कांवड़ यात्रियों को निशुल्क देसी घी में बने गर्मागर्म परांठे प्रसाद के रूप में परोसे जाएंगे।
आमतौर पर भंडारों में दाल-चावल, पूरी-सब्जी, हलवा या खीर परोसी जाती है, लेकिन नागचला का यह भंडारा अपनी अलग पहचान रखता है। यहां पूरे दिन केवल तरह-तरह के देसी घी के परांठे ही बनाए और खिलाए जाते हैं। यही वजह है कि सावन के दौरान यह भंडारा स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
इस अनोखी सेवा की शुरुआत वर्ष 2016 में बाबा शंभू भारती ने की थी। आज, उनकी प्रेरणा से उनके अनुयायी और श्रद्धालु जनसहयोग के माध्यम से इस परंपरा को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। इस वर्ष इस सेवा के 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
आयोजकों के अनुसार, प्रतिदिन करीब डेढ़ से दो क्विंटल आटा और 25 से 30 किलो शुद्ध देसी घी का उपयोग कर तीन से पांच हजार परांठे तैयार किए जाते हैं। इस सेवा में पंजाब सहित कई राज्यों से सेवादार स्वेच्छा से पहुंचकर अपना योगदान देते हैं। लुधियाना के कुक बॉबी भी हर साल यहां आकर परांठे बनाने की सेवा निभाते हैं।
मणिकर्ण, कुल्लू और मनाली की ओर जाने वाले हजारों श्रद्धालु भी इस भंडारे में रुककर प्रसाद ग्रहण करते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां मिलने वाले देसी घी के परांठों का स्वाद और सेवादारों का अपनापन इस भंडारे को खास बनाता है।
श्रद्धा, सेवा और समर्पण का यह अनूठा संगम पूरे सावन माह नागचला में देखने को मिलेगा, जहां बिना किसी भेदभाव के हर आने वाले श्रद्धालु का प्रेम और सम्मान के साथ स्वागत किया जाएगा।

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