पालमपुर में शांता कुमार से प्रो. अनुपमा सिंह की आत्मीय मुलाकात
पालमपुर में शांता कुमार से प्रो. अनुपमा सिंह की आत्मीय मुलाकात
शिक्षा, महिला नेतृत्व, ग्रामीण विकास और हिमाचल के भविष्य पर हुआ सार्थक संवाद
मंडी : अजय सूर्या /
हिमाचल प्रदेश की वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रो. अनुपमा सिंह ने पालमपुर में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री शांता कुमार से आत्मीय भेंट की। करीब 45 मिनट तक चली इस विस्तृत मुलाकात में प्रदेश के सामाजिक एवं राजनीतिक परिदृश्य, ग्रामीण समाज, किसानों की स्थिति, स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी तथा युवाओं के लिए मूल्य आधारित शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
प्रो. अनुपमा सिंह ने इस मुलाकात को अपने लिए अत्यंत प्रेरणादायी अनुभव बताते हुए कहा कि शांता कुमार के दीर्घ सार्वजनिक जीवन, व्यापक अनुभव, अध्ययनशीलता और दूरदर्शी सोच से उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ सार्वजनिक व्यक्तित्वों के अनुभव और नई पीढ़ी की ऊर्जा के बीच संवाद समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
महिला नेतृत्व पर विशेष चर्चा
मुलाकात के दौरान स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि आज महिलाएं परिवार और समाज की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों और अन्य स्थानीय स्वशासी संस्थाओं में प्रभावी नेतृत्व प्रदान कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की महिलाओं में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय शासन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर अधिक संवेदनशील और सहभागी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
चरण स्पर्श के प्रयास पर बोले—“आप मेरी छोटी बहन हैं”
मुलाकात का एक भावुक और आत्मीय क्षण उस समय सामने आया, जब प्रो. अनुपमा सिंह ने शांता कुमार के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके चरण स्पर्श करने का प्रयास किया। इस पर शांता कुमार ने स्नेहपूर्वक उन्हें रोकते हुए कहा—“आप मेरी छोटी बहन हैं।”
शांता कुमार के इस आत्मीय व्यवहार ने मुलाकात को औपचारिक भेंट से आगे बढ़ाकर पारिवारिक एवं भावनात्मक अनुभव में बदल दिया।
स्वामी विवेकानंद के विचारों को शिक्षा से जोड़ने पर जोर
मुलाकात के दौरान स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचारों और युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण पर भी विशेष चर्चा हुई। इस अवसर पर शांता कुमार ने प्रो. अनुपमा सिंह को स्वामी विवेकानंद के जीवन एवं विचारों से प्रेरित अपनी पुस्तक भेंट की।
प्रो. अनुपमा सिंह ने सुझाव दिया कि स्वामी विवेकानंद के जीवन, दर्शन और राष्ट्र निर्माण संबंधी विचारों को भारतीय विद्यालयी पाठ्यक्रम में बच्चों की आयु और शैक्षणिक स्तर के अनुरूप अधिक व्यवस्थित ढंग से शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “यदि हम किसी विचार का बीज बचपन में ही बो दें, तो उसके संस्कार जीवन भर साथ चलते हैं।”
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों से बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक अवस्था में जोड़ने से आत्मविश्वास, अनुशासन, सेवा-भाव, राष्ट्रबोध, चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को विकसित करने में सहायता मिल सकती है। शांता कुमार ने भी युवा पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद के विचारों से जोड़ने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।
“हिमाचल का भविष्य केवल आर्थिक विकास में नहीं”
प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का भविष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक मूल्य, महिला नेतृत्व, ग्रामीण विकास, किसानों की समृद्धि और युवाओं के चरित्र निर्माण से भी जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि अनुभवी सार्वजनिक व्यक्तित्वों के साथ संवाद नई पीढ़ी के लिए सीख का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। ऐसे संवाद अनुभव और ऊर्जा के बीच सेतु का काम करते हैं।
प्रो. अनुपमा सिंह ने शांता कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके साथ हुई यह मुलाकात उनके लिए महज शिष्टाचार भेंट नहीं रही, बल्कि अनुभव, विचार, संस्कार और हिमाचल के भविष्य की दिशा पर एक सार्थक एवं प्रेरणादायी संवाद साबित हुई।

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