चक्की का पुल बनने के वाद भी हिमाचल की रेल सेवा अब भी अधूरी क्यों? चार वर्ष के इंतज़ार के बाद भी केवल तीन ट्रेनें आखिर क्यों?
चक्की का पुल बनने के वाद भी हिमाचल की रेल सेवा अब भी अधूरी क्यों? चार वर्ष के इंतज़ार के बाद भी केवल तीन ट्रेनें आखिर क्यों?"*
नूरपुर:-(विनय महाजन)
नूरपुर प्रदेश मे 20 अगस्त, 2022 को भारी बारिश और चक्की खड्ड में आई बाढ़ ने पठानकोट–जोगिंद्रनगर नैरोगेज रेलमार्ग पर स्थित ऐतिहासिक चक्की रेलवे पुल संख्या-32 को क्षतिग्रस्त कर दिया था। पुल के पिलर बह जाने से इस महत्वपूर्ण रेलमार्ग पर रेल सेवाएं प्रभावित हो गईं। यह जानकारी एक प्रेस नोट मे ब्लड डोनेशन क्लब के प्रधान व समाज सेवक राजीव पठानिया ने देते हुए बताया कि उस समय रेलवे प्रशासन ने कहा था कि नया पुल बनने के बाद रेल सेवा पहले की तरह बहाल कर दी जाएगी। लोगों ने इस आश्वासन पर भरोसा किया और लगभग चार वर्षों तक धैर्यपूर्वक इंतजार किया।जून 2026 में नया पुल तैयार हुआ और रेल सेवा फिर से शुरू हो गई। लेकिन खुशी उस समय निराशा में बदल गई जब लोगों को पता चला कि पुल टूटने से पहले इस रेलमार्ग पर प्रतिदिन सात जोड़ी ट्रेनें चलती थीं जबकि अब केवल तीन जोड़ी ट्रेनों का ही संचालन किया जा रहा हैl सवाल यह है कि जब पुल बन चुका है, ट्रैक पूरी तरह चालू है और ट्रेनों का सुरक्षित संचालन भी हो रहा है, तो फिर शेष चार जोड़ी ट्रेनें क्यों नहीं चलाई जा रही हैं? इस संबंध में रेलवे की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।यह केवल ट्रेनों की संख्या का मामला नहीं है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के लाखों लोगों की सुविधा और क्षेत्रीय विकास का विषय है। देश का पहला ऐसा रेलमार्ग होगा शायद जहां किसी प्राकृतिक आपदा के बाद पुल का पुनर्निर्माण तो कर दिया गया लेकिन पहले से संचालित ट्रेनों की संख्या ही कम कर दी गई। यदि इसके पीछे कोई तकनीकी, परिचालन या वित्तीय कारण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। पारदर्शिता किसी भी सार्वजनिक सेवा की पहली शर्त होती है।धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। श्री ब्रजेश्वरी देवी मंदिर (कांगड़ा), ज्वालामुखी धाम, श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम और बैजनाथ शिव मंदिर जैसे विश्वविख्यात तीर्थस्थलों तक पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालु इस रेलमार्ग का उपयोग करते रहे हैं। उधर इस मामले में बुद्धिजीवी विभाग का कहना है कि हिमाचल प्रदेश के सांसदों ने भी इस मामले को सदन के अंदर गंभीरता से नहीं रखा सिर्फ भाषण व आश्वासन के ऊपर ही जिला कांगड़ा की रेल बैली पर चर्चा करते रहे l इस मामले मे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के एक सदस्य विश्वकर्मा ने सांसद अनुराग शर्मा से आग्रह किया है कि गंभीरता के साथ सदन में इस प्रमुख मुद्दे को उठाया जाए जिसके साथ मोदी सरकार का रेलवे प्रशासन भेदभाव करके जनता को गुमराह कर रहा हैl उन्होंने ने कहा कि यह रेल मार्ग पर्यटन के नजरिया से एक वित्तीय साधनों के लिए अच्छा कदम साबित हो सकता हैl उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार जम्मू कश्मीर प्रांत में पर्यटन को करने के लिए रेलवे को महत्व दे रही है जबकि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में इस रेल वाली को दर किनार करने में लगी है जिससे स्पष्ट भेदभाव नजर आता हैl

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