हिमाचल प्रदेश में निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन विवाद से जुड़ी संजय महाजन की याचिका खारिज
हिमाचल प्रदेश में निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन विवाद से जुड़ी संजय महाजन की याचिका खारिज
नई दिल्ली / शिमला, 20 जुलाई 2026
उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) और स्थानीय चुनाव संबंधी विवाद को लेकर दायर एक अहम याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह फैसला माननीय न्यायमूर्ति पामिदिघंटम श्री नरसिम्हा (Hon'ble Mr. Justice Pamidighantam Sri Narasimha) और माननीय न्यायमूर्ति आलोक अराधे (Hon'ble Mr. Justice Alok Aradhe) की पीठ ने 20 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान सुनाया।
मामले की पृष्ठभूमि और विवरण:
अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह याचिका याचिकाकर्ता संजय महाजन द्वारा 'संजय महाजन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य' (Sanjay Mahajan Vs. State of H.P. & Ors.) के नाम से दायर की गई थी। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में डायरी नंबर 16934/2026 के तहत 19 मार्च 2026 को सुबह 10:21 बजे दर्ज किया गया था, जिसे बाद में विशेष अनुमति याचिका SLP (C) No. 012258/2026 के रूप में पंजीकृत किया गया।
केस से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु:
याचिकाकर्ता: संजय महाजन (Sanjay Mahajan)
प्रतिवादी (Respondents):
हिमाचल प्रदेश सरकार (State of H.P.)
पंचायती राज निदेशक (The Director of Panchayati Raj)
उपायुक्त (डीसी), कांगड़ा (The Deputy Commissioner Kangra)
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता: पल्लवी सिंह (Pallavi Singh)
मामले की श्रेणी: 1805 - चुनाव और परिसीमन कानून (Election and Delimitation Laws)
अदालत का फैसला:
सोमवार (20 जुलाई 2026) को यह मामला नए व लंबित मामलों (Motion Hearing / Fresh Matters) के तहत माननीय न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष कोर्ट रूम में क्रम संख्या 10 पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। खंडपीठ ने मामले की दलीलें सुनने के बाद याचिका को कानूनी रूप से विचार योग्य न पाते हुए तुरंत खारिज (Dismissed) कर दिया। इस आदेश के साथ ही इस केस का पूरी तरह से निपटारा (Disposed) हो चुका है।
मामले का महत्व:
यह कानूनी विवाद मुख्य रूप से कांगड़ा जिले में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण और पंचायती राज विभाग के प्रशासनिक फैसलों को चुनौती देने से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब राज्य सरकार और कांगड़ा जिला प्रशासन के निर्णयों पर कानूनी रोक लगाने की सभी संभावनाएं समाप्त हो गई हैं।

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