चन्जेहड़, समाना, भोड़ा और घडू में जनता की पुकार: "पानी नहीं, राहत नहीं, जवाब नहीं" — कांग्रेस सरकार के खिलाफ फूटा जनाक्रोश

 चन्जेहड़, समाना, भोड़ा और घडू में जनता की पुकार: "पानी नहीं, राहत नहीं, जवाब नहीं" — कांग्रेस सरकार के खिलाफ फूटा जनाक्रोश जनता बेहाल, मुख्यमंत्री मालामाल! आखिर प्राकृतिक आपदा के पैसों का हिसाब कौन देगा?" — विपिन सिंह परमार


पालमपुर।

सुलह विधानसभा क्षेत्र के चन्जेहड़, समाना, भोड़ा और घडू पंचायतों के दौरे के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान ग्रामीणों ने पीने के पानी की गंभीर समस्या, बदहाल व्यवस्थाओं और सरकार की कार्यशैली को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया। कई गांवों में लोगों ने बताया कि बरसात के मौसम में भी पेयजल संकट बना हुआ है, लेकिन सरकार और प्रशासन इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।

इस अवसर पर विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार पूरी तरह जनविरोधी साबित हुई है। एक ओर प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, प्राकृतिक आपदाओं और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री की घोषित संपत्ति को लेकर उठ रहे सवालों ने सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

परमार ने कहा कि मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री उत्तर भारत के सबसे अधिक संपत्ति घोषित करने वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल बताए जा रहे हैं। ऐसे में हिमाचल की जनता यह पूछ रही है कि आखिर सरकार का ध्यान जनता की समस्याओं के समाधान पर है या सत्ता के सुख पर।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हिमाचल ने भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया। केंद्र सरकार ने राहत और पुनर्वास के लिए हरसंभव आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, लेकिन आज भी हजारों प्रभावित परिवार राहत, मुआवजे और पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार मांग कर रही है कि केंद्र से प्राप्त सहायता राशि का पूरा और पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए। जनता को बताया जाए कि कितनी राशि किस मद में खर्च हुई और कितने प्रभावित परिवारों तक वास्तव में राहत पहुंची।

विपिन सिंह परमार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले बड़ी-बड़ी गारंटियां देकर जनता से वोट तो ले लिए, लेकिन साढ़े तीन वर्षों में प्रदेश को केवल कर्ज, अव्यवस्था और निराशा मिली। विकास कार्य ठप पड़े हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, किसान-बागवान परेशान हैं और आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए दर-दर भटक रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास विकास कार्यों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के भुगतान के लिए धन नहीं है, तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति इस कदर बदहाल कैसे हो गई? इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना चाहिए।

परमार ने कहा कि जिन क्षेत्रों का उन्होंने दौरा किया, वहां लोगों में सबसे अधिक नाराजगी पीने के पानी की समस्या को लेकर देखने को मिली। कई गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं, लेकिन सरकार के मंत्री और अधिकारी केवल बयानबाजी में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर जनता की अदालत तक पूरी मजबूती के साथ उठाएगी। लोकतंत्र में जनता के पैसे का हिसाब देना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और कांग्रेस सरकार इससे बच नहीं सकती।

अंत में विपिन सिंह परमार ने कहा, "हिमाचल की जनता अब वादे नहीं, जवाब चाहती है। केंद्र से मिली राहत राशि का पूरा हिसाब कब मिलेगा? आपदा पीड़ितों को न्याय कब मिलेगा? और चुनावी गारंटियों का हिसाब कब दिया जाएगा? जनता बेहाल है और सरकार जवाब देने से बच रही है, लेकिन भाजपा जनता की आवाज बनकर हर सवाल का जवाब लेकर रहेगी।"

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