गुरु पूर्णिमा पर पूज्य गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त करना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य : विपिन सिंह परमार
गुरु पूर्णिमा पर पूज्य गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त करना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य : विपिन सिंह परमार
पालमपुर
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान, संस्कार, आत्मबल और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस महान गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है, जिसने सदियों से समाज और राष्ट्र को दिशा प्रदान की है।
गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर विपिन सिंह परमार ने विभिन्न पूज्य संतों एवं आध्यात्मिक गुरुओं से स्नेहिल भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने श्री गोविंद आश्रम, परौर में श्री प्रेमानंद महाराज जी तथा पूज्य संतों के दर्शन किए। इसके उपरांत भवारना में श्री संदीप पुरोहित जी, सुप्रसिद्ध कथावाचक श्री अनिल डोहरू जी का नौरा में तथा शांतल में पूज्य श्री कृष्ण पुरी महाराज जी के चरणों में उपस्थित होकर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया।
परमार ने कहा कि गुरु का आशीर्वाद मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। गुरु केवल शिक्षा नहीं देते, बल्कि वे व्यक्ति के भीतर सेवा, त्याग, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, मानवता और नैतिक मूल्यों का संचार करते हैं। ऐसे पूज्य संतों एवं गुरुओं का सान्निध्य व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ समाज को भी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाता है।
उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी ने अपने जीवन और वाणी के माध्यम से समाज को समरसता, समानता, मानवता, भक्ति और सामाजिक न्याय का अमर संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज में सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देते हैं। गुरु रविदास जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि मानव की पहचान उसके कर्म, चरित्र और सेवा भावना से होती है, न कि जाति या किसी अन्य भेदभाव से।
विपिन सिंह परमार ने बताया कि इसके उपरांत उन्होंने दरंग स्थित गुरु रविदास मंदिर में आयोजित गुरु रविदास जयंती समारोह में भी श्रद्धापूर्वक सहभागिता की तथा संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए समरसता, समानता, मानव सेवा और सामाजिक सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
उन्होंने सुप्रसिद्ध कथावाचक श्री अनिल डोहरू जी व कथावाचक श्री संदीप शर्मा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे अपनी ओजस्वी एवं प्रेरणादायी कथाओं के माध्यम से सनातन संस्कृति, भारतीय जीवन मूल्यों, धर्म, अध्यात्म और राष्ट्र चेतना का प्रभावी प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उनकी कथाएं नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ नैतिक जीवन, सेवा और संस्कारों की प्रेरणा भी देती हैं। ऐसे संतों, विद्वानों और कथावाचकों का समाज में विशेष महत्व है, क्योंकि वे आध्यात्मिक चेतना के साथ सामाजिक जागरूकता का भी विस्तार करते हैं।
विपिन सिंह परमार ने प्रदेश एवं देशवासियों को गुरु पूर्णिमा एवं गुरु रविदास जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूज्य गुरुओं का आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक उन्नति का संचार करे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुरुजनों का मार्गदर्शन समाज में प्रेम, सद्भाव, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रहित की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा भारत की महान आध्यात्मिक परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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