सुक्खू सरकार कर्मचारी हितैषी है तो प्रदेश भर में कर्मचारी सड़कों पर क्यों हैं : जयराम ठाकुर

  सुक्खू सरकार कर्मचारी हितैषी है तो प्रदेश भर में कर्मचारी सड़कों पर क्यों हैं : जयराम ठाकुर

 कर्मचारियों के धरने में जाकर भी उन्हें बरगलाया, आधी-अधूरी बातें करके चले आए, उनकी कही बातों पर किसी को रत्ती भर भरोसा नही 


शिमला : गायत्री गर्ग /

 बोले - पेपर लीक पर सख्त प्रावधान मोदी सरकार ही करेगी, कांग्रेस की सरकार में धड़ल्ले से हुए पेपर लीक, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों में टूटे सभी रिकॉर्ड, हिमाचल में पेपर लीक के दोषी अधिकारियों को सुक्खू सरकार ने दी प्रमोशन और प्राइम पोस्टिंग

शिमला 

 शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू कहते हैं कि वह कर्मचारी हितैषी हैं तो आज प्रदेश भर में कर्मचारी सड़कों पर क्यों हैं? अपने हक के लिए उन्हें संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है। पेंशनर्स, पेंशन और सेवानिवृत्त कर्मी अपने लंबित भुगतानों के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं? बीते कल प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ कि कर्मचारियों के धरना स्थल पर जाकर भी मुख्यमंत्री ने इधर-उधर की आधी-अधूरी बातें करके सिर्फ लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। मुख्यमंत्री की झूठ बोलने की आदत से कर्मचारी भी बखूबी वाकिफ हैं, इसीलिए उन्होंने मुख्यमंत्री के भाषण के समय भी अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की, क्योंकि कर्मचारियों को यह बात बहुत अच्छे से पता है कि मुख्यमंत्री झूठी गारंटियां देने और झूठी घोषणाएं करने में माहिर हैं। इसलिए वह सिर्फ कर्मचारियों को गुमराह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि झूठ बोलकर, लोगों को गुमराह करके सरकार नहीं चलाई जा सकती। मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए और उन्हें सोचना चाहिए कि आखिर उनकी बातों पर किसी को भरोसा क्यों नहीं रहा।


जयराम ठाकुर ने कहा कि पेपर लीक पर सख्त कानून लाकर युवाओं के भविष्य की रक्षा का काम मोदी सरकार ही कर रही है, जबकि कांग्रेस के शासन में पेपर लीक माफिया बेखौफ होकर सक्रिय रहा। आज संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक लाकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस संशोधन में पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों के लिए 10 वर्ष तक की सजा, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने, 2 महीने के भीतर जांच पूरी करने और 3 महीने के भीतर ट्रायल समाप्त करने का प्रावधान किया गया है, ताकि दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके और युवाओं का भरोसा परीक्षा व्यवस्था पर कायम रहे।


नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इसके विपरीत, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों के दौरान पेपर लीक के मामलों ने सभी रिकॉर्ड तोड़े और लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। हिमाचल प्रदेश में भी पेपर लीक के मामलों में गंभीर आरोप सामने आने और जांच की संस्तुति होने के बावजूद सुक्खू सरकार ने दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पदोन्नति देकर महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया। एक ओर मोदी सरकार संसद के माध्यम से कठोर कानूनी प्रावधान लागू कर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर रही है, वहीं कांग्रेस शासित राज्यों और हिमाचल में उसका रिकॉर्ड पेपर लीक के आरोपियों को संरक्षण देने और युवाओं के साथ अन्याय करने का रहा है।

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