गुरु पूर्णिमा पर गुरु शिष्य परंपरा को समर्पित भव्य समारोह, सुरों और संस्कारों से गूंजा सुभाषिनी संस्थान
गुरु पूर्णिमा पर गुरु शिष्य परंपरा को समर्पित भव्य समारोह, सुरों और संस्कारों से गूंजा सुभाषिनी संस्थान
हिमाचल कल्चर एंड हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा संचालित सुभाषिनी संगीत, नृत्य एवं नाट्य कला संस्थान ,में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया । कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत ,भजन, वादन एवं नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर गुरु शिष्य परंपरा के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की।
समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध वायलिन वादक उस्ताद बृजलाल का संस्थान की प्राचार्य नीरा चौहान द्वारा शाल एवं हिमाचली टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया । इस अवसर पर उस्ताद बृजलाल ने कहा कि भारतीय संगीत की आत्मा गुरु शिष्य परंपरा में निहित है ,तथा गुरु का सम्मान ही हमारी सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रियाज अनुशासन और समर्पण के साथ संगीत साधना करने का आवाह्न किया। संस्थान की प्राचार्य नीरा चौहान ने अपने संबोधन में कहा की गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं बल्कि अपने गुरु जनों के प्रति श्रद्धा सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है । उन्होंने बताया कि सुभाषिनी संगीत नृत्य एवं नाट्य कला संस्थान भारतीय शास्त्रीय संगीत नृत्य एवं नाट्य कला के संरक्षण संवर्धन एवं विकास के लिए निरंतर कार्यरत है । संस्थान प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ से संबद्ध है जहां संगीत एवं नृत्य विषयों में सर्टिफिकेट डिप्लोमा तथा बैचलर डिग्री स्तर के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं । संस्थान का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति शास्त्रीय संगीत एवं कलाओं से जोड़ते हुए उत्कृष्ट कलाकार तैयार करना है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों अभिभावकों एवं स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया अंत में सभी अतिथियों गुरुजनों अभिभावकों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया गया तथा भारतीय संगीत एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया गया
जारी करता
प्राचार्य
सुभाषिनी संगीत, नृत्य एवं नाट्य कला संस्थान
पंचरुखी ,हिमाचल प्रदेश।

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