ज्वाली के घाड़ जरोट पौंग बांध क्षेत्र में भू-माफिया का आतंक: अदालत के आदेशों को ठेंगा दिखाकर हो रही है अवैध खेती
ज्वाली के घाड़ जरोट पौंग बांध क्षेत्र में भू-माफिया का आतंक: अदालत के आदेशों को ठेंगा दिखाकर हो रही है अवैध खेती
हिमाचल प्रदेश के ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घाड़ जरोट पौंग बांध क्षेत्र में भू-माफिया द्वारा नियमों और अदालत के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पिछले 4-5 दिनों से इस संवेदनशील क्षेत्र में ट्रैक्टरों के माध्यम से भूमि पर अवैध रूप से हल चलाया जा रहा है, जबकि माननीय न्यायालय द्वारा इस भूमि पर खेती करने और बीजने पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद, भू-माफिया पिछले कई वर्षों से लगातार इस पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील भूमि का दोहन करने में लगा हुआ है। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि कुछ लोग अपने राजनीतिक और प्रशासनिक रसूक का फायदा उठाकर लगातार अदालत के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं और प्रशासन द्वारा इन पर केवल नाममात्र की कार्रवाई करके औपचारिकता पूरी कर दी जाती है।
प्रशासनिक सुस्ती और ढुलमुल रवैये से तंग आकर अब स्थानीय लोगों ने खुद ही इस अवैध गतिविधि के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अब इस क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति खेती करता हुआ पाया गया, तो उसका नाम उजागर करते हुए उसकी वीडियो सोशल मीडिया पर लाइव की जाएगी ताकि इन दबंगों की असलियत सबके सामने आ सके।
इस पूरे मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण प्रेमी मिलखी राम ने कहा कि एक स्थानीय युवक द्वारा जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल की गई है, वह बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाती है। पौंग वेटलैंड (आर्द्रभूमि) अंतरराष्ट्रीय महत्व का क्षेत्र है जहाँ सर्दियों के मौसम में विदेशों से हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी मेहमान के रूप में आते हैं। इस क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र (इकोसिस्टम) इन पक्षियों और यहां की जैव विविधता के लिए बेहद अहम है, जिस पर अवैध खेती और मानवीय हस्तक्षेप के कारण गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अदालत के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद भू-माफिया का अपनी हरकतों से बाज न आना प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के इकबाल पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। स्थानीय पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि पौंग बांध क्षेत्र के पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाया जा सके।

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