मानवीय गुणों के विकास के लिए जीवन में पूर्ण सतगुरु का होना आवश्यक : स्वामी हरीशानंद जी
मानवीय गुणों के विकास के लिए जीवन में पूर्ण सतगुरु का होना आवश्यक : स्वामी हरीशानंद जी
नूरपुर : विनय महाजन /
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के स्थानीय बौड़ नूरपुर आश्रम में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम एवं भजन संकीर्तन का आयोजन श्रद्धापूर्वक किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा रमन जी द्वारा सुमधुर भजनों के गायन से हुआ। भजनों की आध्यात्मिक धुनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।इस अवसर पर श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी हरीशनंद जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के अनुसार जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का प्रभाव बढ़ता है, तब भगवान अवतार धारण करते हैं। भगवान के अवतार लेने का परम उद्देश्य धर्म की स्थापना करना तथा मानव समाज को सत्य, सदाचार और आध्यात्मिक मार्ग की ओर अग्रसर करना होता है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य बाहरी रूप से तो अत्यधिक प्रगति कर रहा है, लेकिन अपने वास्तविक मानवीय मूल्यों से दूर होता जा रहा है। धर्म से विमुखता के कारण मनुष्य के भीतर प्रेम, करुणा, दया, सहनशीलता, सत्य एवं सद्भाव जैसे मानवीय गुण निरंतर लुप्त होते जा रहे हैं। आज समाज में तनाव, अशांति, स्वार्थ और आपसी वैमनस्य जैसी परिस्थितियां इसी आंतरिक पतन का परिणाम हैं।स्वामी हरीशनंद जी ने कहा कि केवल मानव शरीर को प्राप्त कर लेना ही मानवता का लक्षण नहीं है। मनुष्य के भीतर मानवीय गुणों का होना भी उतना ही आवश्यक है। हमारे महापुरुषों ने मनुष्य को ‘मनुर्भवो, मनुर्भवो’ अर्थात वास्तविक अर्थों में मनुष्य बनने का संदेश दिया है। मनुष्य तभी सच्चे अर्थों में मानव बन सकता है, जब उसके भीतर सद्गुणों का विकास हो और उसका जीवन प्रेम, सेवा एवं सदाचार से परिपूर्ण हो।उन्होंने आगे कहा कि मानवीय गुणों के विकास और अंतर्मन के रूपांतरण के लिए जीवन में पूर्ण सतगुरु का होना आवश्यक है। सतगुरु द्वारा प्रदान किया गया ब्रह्मज्ञान मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है। प्राप्त ब्रह्मज्ञान की नियमित ध्यान-साधना ही व्यक्ति के मन को भीतर से परिवर्तित कर सकती है तथा जीवन में सकारात्मक एवं आध्यात्मिक चेतना का संचार कर सकती हैl कार्यक्रम के दौरान विश्व कल्याण की भावना से ओतप्रोत होकर उपस्थित भक्तजनों ने सामूहिक ध्यान-साधना की। इसके पश्चात भजन संकीर्तन में भक्तजन सुमधुर भजनों पर भावविभोर होकर झूम उठे। कार्यक्रम का समापन सभी के मंगलमय जीवन एवं विश्व शांति की प्रार्थना के साथ हुआ।

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