मणिमहेश यात्रा को बनाएं ईको-फ्रेंडली: भरमौर वन मंडल की अनूठी पहल, डीसी-एडीएम समेत अधिकारियों ने किया 26 किमी का पैदल ट्रेक
मणिमहेश यात्रा को बनाएं ईको-फ्रेंडली: भरमौर वन मंडल की अनूठी पहल, डीसी-एडीएम समेत अधिकारियों ने किया 26 किमी का पैदल ट्रेक
चम्बा : जितेन्द्र खन्ना /
पवित्र श्री मणिमहेश यात्रा को पर्यावरण के अनुकूल और स्वच्छ बनाए रखने के लिए भरमौर वन मंडल ने एक सराहनीय और सख्त पहल की है। बुधवार (05 अगस्त 2026) को चम्बा के उपायुक्त (DC), एडीएम भरमौर, लोक निर्माण विभाग (HPPWD) के अधिशासी अभियंता, हरसार पंचायत के स्थानीय लोगों और वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से 26 किलोमीटर लंबा कठिन ट्रेक तय कर भरमौर से मणिमहेश मार्ग का जायजा लिया।
औषधीय पौधों और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है मार्ग
अधिकारियों के इस दल में वन विभाग से जुड़े श्री करतार (FGD) और अमित वन मित्र भी शामिल रहे। यात्रा के दौरान अधिकारियों ने पाया कि पूरा ट्रेक मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता, खिले हुए रंग-बिरंगे औषधीय पौधों, हरे-भरे अल्पाइन मीडोज (घास के मैदानों), प्राचीन जंगलों और कलकल बहते प्राकृतिक झरनों से समृद्ध है। यह क्षेत्र न केवल एक धार्मिक तीर्थस्थल है, बल्कि एक बेहद संवेदनशील प्राकृतिक धरोहर भी है।
प्रदूषण रोकने के लिए कड़े दिशा-निर्देश
इस पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को बचाने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रशासन और वन विभाग ने तीर्थयात्रियों और दुकानदारों के लिए निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
प्रतिबंधित वस्तुएं: यात्रा मार्ग पर तंबाकू उत्पाद, गुटका, सिगरेट, छोटे चिप्स के पैकेट, छोटे कोल्ड ड्रिंक की बोतलें और पतले डिस्पोजेबल रेनकोट बेचने पर रोक लगाई गई है।
प्लास्टिक पर लगाम: पानी की केवल 1 लीटर या उससे अधिक क्षमता वाली बोतलें ही बेची जा सकेंगी। सिंगल-यूज प्लास्टिक के प्रयोग से बचने की सख्त अपील की गई है।
दुकानदारों की जिम्मेदारी: सभी विक्रेता अपनी दुकानों पर डस्टबिन या कचरा बैग रखेंगे और संग्रहित कचरे को तयशुदा कलेक्शन पॉइंट पर ही सौंपेंगे।
तीर्थयात्रियों से अपील: यात्री अपने साथ लाए गए नॉन-बायोडायग्रैडिएबल कचरे (टॉफी के रैपर, प्लास्टिक की बोतलें, फूड पैकेजिंग, डिस्पोजेबल प्लेटें आदि) को वापस लाएं और निर्धारित कूड़ेदानों में ही डालें।
वन संपदा की सुरक्षा: प्राकृतिक झरनों को गंदा करने, फूल तोड़ने या औषधीय पौधों को उखाड़ने से पूरी तरह मना किया गया है।
"श्री मणिमहेश हमारी अमूल्य प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। इसकी पवित्रता और हरियाली को बचाए रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।"
— भरमौर वन मंडल

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