माता बगलामुखी के दरबार में माथा टेकने के साथ कांगड़ा घाटी की सातों ट्रेनें बहाल करवाने की पहल करें केंद्र सरकार का रेलवे मंत्रालय
माता बगलामुखी के दरबार में माथा टेकने के साथ कांगड़ा घाटी की सातों ट्रेनें बहाल करवाने की पहल करें केंद्र सरकार का रेलवे मंत्रालय
(नूरपुर:-विनय महाजन)
माता बगलामुखी के पावन दरबार में आपके आगमन पर हार्दिक शुभकामनाएँ। हमारी प्रार्थना है कि भारत सरकार के सभी मंत्रियों की माता बगलामुखी मनोकामनाएँ पूर्ण करें और आपको जनसेवा करने की शक्ति एवं सफलता प्रदान करें।माता के दरबार में आकर श्रद्धा से माथा टेकना निश्चित रूप से सौभाग्य की बात है, लेकिन इसी अवसर पर कांगड़ा घाटी की जनता और हजारों श्रद्धालुओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण जनहित का विषय भी आपके ध्यान में लाना चाहता हूँ।माता बगलामुखी मंदिर के लिए गुलेर और ज्वालामुखी रोड दो महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन हैं। दोनों स्टेशनों से माता के मंदिर की दूरी लगभग 10–11 किलोमीटर है। कांगड़ा वैली की छोटी रेलगाड़ी केवल एक परिवहन साधन नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान, स्थानीय जीवन और धार्मिक पर्यटन से भी जुड़ी हुई है।पंजाब के अमृतसर, गुरदासपुर, दीनानगर, मुकेरियां, दसुआ, हाजीपुर सहित अनेक क्षेत्रों से श्रद्धालु और आम यात्री कांगड़ा घाटी की छोटी रेलगाड़ियों से यात्रा करते हैं। माता बगलामुखी, ज्वालामुखी, चामुंडा देवी, ब्रजेश्वरी देवी और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह रेल सेवा किफायती और सुविधाजनक साधन रही है।दुर्भाग्य की बात है कि वर्तमान में कांगड़ा घाटी की सातों ट्रेनें बंद हैं। इससे सबसे अधिक परेशानी स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, छोटे व्यापारियों, बुजुर्गों और धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को हो रही है। महंगी परिवहन व्यवस्था के कारण आम आदमी की यात्रा का खर्च भी बढ़ जाता है।रेल सेवा बंद होने का प्रभाव केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर धार्मिक पर्यटन, स्थानीय दुकानदारों, टैक्सी चालकों, होटल व्यवसाय, छोटे व्यापार और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कांगड़ा घाटी में आने वाला श्रद्धालु जब रेल से आसानी से विभिन्न धार्मिक स्थलों तक पहुँचता है, तो उसका लाभ स्थानीय लोगों को भी मिलता है।माता बगलामुखी के दरबार में आकर आशीर्वाद प्राप्त करना अपनी जगह श्रद्धा का विषय है, लेकिन उसी माता की धरती पर रहने वाली जनता और यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवाज उठाना भी एक प्रकार की जनसेवा है।कांगड़ा घाटी की रेल केवल ट्रेन नहीं, क्षेत्र की जीवनरेखा हैl कांगड़ा घाटी की छोटी रेलगाड़ी का अपना ऐतिहासिक महत्व है। यह पहाड़ी क्षेत्र की खूबसूरती और विरासत से जुड़ी हुई है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी कांगड़ा वैली की रेल यात्रा अपने आप में आकर्षण का केंद्र है।इसलिए सरकार और रेलवे से भी हमारा आग्रह है कि इस रेल सेवा को केवल आर्थिक दृष्टि से न देखा जाए। पहाड़ी क्षेत्रों में रेल सेवा का सामाजिक और पर्यटन संबंधी महत्व भी होता है। जहां सड़क परिवहन महंगा पड़ता है, वहां रेल आम जनता के लिए सस्ता और भरोसेमंद विकल्प प्रदान करती है। यह जानकारी एक प्रेस नोट में पी सी विश्वकर्मा प्रधान कांगड़ा घाटी रेल सँघर्ष समिति द्वारा दी गईं है जिस पर उन्होंने पूरे केंद्र सरकार के रेलवे मंत्रालय के एक पूर्व मंत्री के आदेश पर खमियाजा कांगड़ा रेलवे वैली की जनता को भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश की माता बगलामुखी मंदिर में मत्था टेका है

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