गुरु चरणों से जुड़कर ही भक्त के जीवन का कल्याण संभव : साध्वी राजविंद्र भारती
गुरु चरणों से जुड़कर ही भक्त के जीवन का कल्याण संभव : साध्वी राजविंद्र भारती
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्थानीय बौड़ नूरपुर आश्रम में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आध्यात्मिक ज्ञान, भजन एवं साधना का लाभ प्राप्त किया। इस दौरान पूरा आश्रम परिसर प्रभु भक्ति एवं गुरु महिमा के भावों से ओत-प्रोत रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा अश्विनी द्वारा सुमधुर भजनों के गायन से हुआ। इसके उपरांत आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुश्री राजविंद्र भारती ने आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रभु भक्तों एवं संतों के जीवन चरित्र से अवगत करवाया ।
साध्वी राजविंद्र भारती ने कहा कि संतों का जीवन मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत होता है। उनके जीवन में गुरु के प्रति दिखाई देने वाली श्रद्धा, समर्पण और आज्ञापालन की भावना प्रत्येक साधक को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने संत सहजो बाई जी के जीवन की एक प्रेरणादायक घटना का वर्णन करते हुए गुरु चरणों की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सहजो बाई जी के हृदय में अपने गुरु के चरणों के प्रति अटूट श्रद्धा एवं समर्पण था। गुरु महिमा को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा—
“गुरु चरण कमल बलिहारी रे, मेरे मन की दुविधा टारी रे।”
साध्वी ने इस भाव की व्याख्या करते हुए कहा कि गुरु के चरणों में समर्पित होकर ही मनुष्य अपने जीवन की दुविधाओं और अज्ञान से मुक्त होकर आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि संतों ने सदैव गुरु चरणों की महिमा का वर्णन किया है। साधक जब गुरु की आज्ञा को अपने जीवन का आधार बनाकर उनके बताए आध्यात्मिक मार्ग पर साधना करता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है। गुरु की आज्ञा में रहकर किया गया जीवन मनुष्य को आत्मिक शांति एवं परम लक्ष्य की ओर ले जाता है।
कार्यक्रम का समापन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ हुआ।

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