कांगड़ा घाटी रेलवे की बदहाली पर फूटा गुस्सा: संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र, रेल सेवा बढ़ाने की मांग
कांगड़ा घाटी रेलवे की बदहाली पर फूटा गुस्सा: संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र, रेल सेवा बढ़ाने की मांग
धर्मशाला:
हिमाचल प्रदेश की धरोहर कांगड़ा घाटी रेलवे (पठानकोट-जोगिंदर नगर रेलखंड) की खस्ताहाल व्यवस्था को लेकर क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश है। 'कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर रेल सेवाओं के विस्तार और अव्यवस्थाओं को दूर करने की पुरजोर मांग की है।
सांसद द्वारा सेवा बहाल, लेकिन नाकाफी
समिति के अध्यक्ष पी.सी. विश्वकर्मा ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि पिछले चार वर्षों तक बंद रहने के बाद, 2 जून 2026 को सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा दो ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर सेवा शुरू की गई, जिसका स्थानीय लोगों ने स्वागत किया था। हालांकि, समिति का कहना है कि जहां पहले इस ट्रैक पर सात ट्रेनें चलती थीं, वहीं अब केवल दो ट्रेनों के संचालन से यात्रियों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
शुक्रवार को रेल बंदी पर सवाल
74 वर्षीय संघर्ष समिति अध्यक्ष पी.सी. विश्वकर्मा ने ट्रैक रखरखाव और सफाई के नाम पर प्रत्येक शुक्रवार को रेल सेवाएं पूरी तरह बंद रखने पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा, "अपने जीवन के सात दशकों में मैंने कभी नहीं सुना कि ट्रेनों की सफाई के लिए पूरा दिन रेल सेवा ठप कर दी जाती है। यह तर्क समझ से परे है और आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है।"
प्रमुख मांगें:
संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री से निम्नलिखित हस्तक्षेप की मांग की है:
ट्रेनों की संख्या बढ़ाना: कांगड़ा घाटी रेलवे पर ट्रेनों का संचालन पुनः पुरानी संख्या (सात ट्रेन) के अनुरूप किया जाए।
सेवा की विश्वसनीयता: रेल सेवाओं को नियमित बनाया जाए ताकि विद्यार्थी, कर्मचारी और व्यापारी उन पर भरोसा कर सकें।
अनावश्यक बंदी खत्म हो: ट्रैक रखरखाव और सफाई की आधुनिक व्यवस्था अपनाई जाए, जिससे आम यात्रियों को असुविधा न हो।
संवाद का मौका: समिति के प्रतिनिधिमंडल को प्रधानमंत्री या रेलवे के उच्च अधिकारियों से मिलकर क्षेत्र की समस्याओं को विस्तार से रखने का समय (अपॉइंटमेंट) दिया जाए।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर असर
कांगड़ा घाटी रेलवे न केवल स्थानीय लोगों के लिए जीवनरेखा है, बल्कि यह पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि सेवाओं में सुधार नहीं हुआ, तो यह क्षेत्र की आर्थिक स्थिति और पर्यटकों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित करेगा।
इस ज्ञापन की प्रतियां रेल मंत्री, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और संबंधित मंडल रेल प्रबंधक (जम्मू) को भी भेजी गई हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस ऐतिहासिक रेलवे लाइन की बेहतरी के लिए क्या कदम उठाती है।

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