चार साल से लापता पुलिस जवान अजय कुमार, परिजनों ने उठाए जांच पर गंभीर सवाल

 चार साल से लापता पुलिस जवान अजय कुमार, परिजनों ने उठाए जांच पर गंभीर सवाल

खाकी पर उठे सवाल: ड्यूटी के दौरान रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुए थे कांस्टेबल अजय; परिजनों ने पूछे सिस्टम को हिला देने वाले 5 तीखे सवाल


सुंदरनगर/मंडी : अजय सूर्या /

हिमाचल प्रदेश पुलिस के कांस्टेबल अजय कुमार को लापता हुए पूरे चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज दिन तक पुलिस प्रशासन उनका कोई सुराग लगाने में नाकाम रहा है। 13 जून 2022 को ड्यूटी के दौरान रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुए अजय कुमार का मामला एक बार फिर गरमा गया है। हाल ही में पुलिस अधीक्षक (SP) मंडी द्वारा परिजनों को मामले की समीक्षा और निष्पक्ष जांच का आश्वासन तो दिया गया है, जिससे परिवार में एक उम्मीद जगी है, लेकिन इसके साथ ही परिजनों ने पुलिस की अब तक की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

 "मेरा बेटा कहां है?" – बेबस माता-पिता का दर्द

सुंदरनगर उपमंडल के पलोहटा (पलेहटा) गांव के निवासी अजय कुमार के बूढ़े माता-पिता पिछले 4 वर्षों से मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं। हाथों में अपने बेटे की तस्वीर थामे बेबस माता-पिता का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी पर झूठा आरोप लगाना नहीं है, वे केवल यह जानना चाहते हैं कि उनका बेटा किस स्थिति में और कहां है। परिजनों के अनुसार, 13 जून 2022 को अजय से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी, जिसमें उन्होंने खुद को ड्यूटी पर तैनात बताया था, जिसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है

 जांच प्रक्रिया को कटघरे में खड़े करते 5 बड़े सवाल

लापता जवान के परिजनों और उनके चाचा ने जांच एजेंसियों के समक्ष कई अहम तथ्य रखते हुए निम्नलिखित सवाल उठाए हैं:

 1. बैंक ट्रांजेक्शन का रहस्य: जब अजय की तैनाती केलांग क्षेत्र में थी, तो उनके लापता होने के बाद उनके बैंक खाते से कोटली क्षेत्र में वित्तीय लेन-देन किसने और कैसे किया? इस बिंदु की गहन तकनीकी जांच क्यों नहीं की गई?

 2. कॉल डिटेल्स (CDR) की अधूरी कड़ी: आखिरी फोन कॉल पर खुद को ऑन-ड्यूटी बताने वाले अजय के मोबाइल की आखिरी लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड्स का पूरा सच अब तक सामने क्यों नहीं लाया जा सका?

 3. सबूतों की अनदेखी: अजय के चाचा का दावा है कि उन्होंने जांच एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सुराग सौंपे हैं, लेकिन पुलिस इन इनपुट्स के आधार पर किसी ठोस नतीजे तक पहुंचने में विफल रही है।

 4. महकमे की ढीली चाल: परिजनों का कहना है कि यदि आम आदमी की बजाय खुद पुलिस का अपना जवान सुरक्षित नहीं है और 4 साल तक उसका कोई सुराग नहीं मिलता, तो यह सीधे तौर पर महकमे की नाकामी को दर्शाता है।

 जवाबदेही किसकी?: इस पूरे मामले में हो रही देरी और बुजुर्ग माता-पिता को मिल रही मानसिक प्रताड़ना का आखिर जिम्मेदार कौन है?

 समयबद्ध (Time-bound) और पारदर्शी जांच की मांग

पीड़ित परिवार ने पुलिस महानिदेशक और राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि इस संवेदनशील मामले की पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की जाए ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके और उनके बेटे का पता चल सके। फिलहाल, एसपी मंडी के आश्वासन के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों की निगाहें पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

कौन हैं अजय कुमार?

 पद: कांस्टेबल, हिमाचल प्रदेश पुलिस

 निवासी: गांव पलोहटा (पलेहटा), सुंदरनगर, जिला मंडी

 लापता होने की तिथि: 13 जून 2022

आखिरी बातचीत: 13 जून 2022 को फोन पर, स्वयं को ड्यूटी पर बताया था।

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