गपां दा बनाना कड़ाह त घियो कजो घट पाना : त्रिलोक कपूर

 गपां दा बनाना कड़ाह त घियो कजो घट पाना : त्रिलोक कपूर


धर्मशाला

भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने सुक्खू सरकार के बजट को "विरोधाभासों का पुलिंदा" करार देते हुए कहा कि यह बजट केवल अखबारों की सुर्खियां बटोरने का साधन है, धरातल पर शून्य है। 


उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सिकुड़ता बजट, रुकता विकास मुख्यमंत्री को इतिहास की सबसे बड़ी विफलता के तमगे से नवाजेगी। 

हिमाचल के इतिहास में पहली बार विकास का पहिया पीछे की ओर घूमा है। 


त्रिलोक कपूर ने आंकड़ों के साथ घेराव करते हुए कहा कि पिछले वर्ष जहाँ बजट ₹58,514 करोड़ था, उसे घटाकर इस बार ₹54,928 करोड़ कर दिया गया है। बजट का आकार छोटा करना मुख्यमंत्री की प्रशासनिक विफलता का सीधा प्रमाण है। जब बजट ही कम होगा, तो विकास कार्यों के लिए पैसा कहाँ से आएगा? यह बजट प्रदेश को प्रगति की ओर नहीं, बल्कि गर्त की ओर ले जाने वाला है।

वास्तव में यह बजट "गप्पों का कड़ाह" है। गरीब के नाम पर केवल छलावा किया गया है।

300 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा को कपूर ने "बिना घी का कड़ाह" बताया। उन्होंने तर्क दिया कि एक अति गरीब परिवार केवल रोशनी के लिए बिजली जलाता है। उसके पास न हीटर है, न गीजर और न ही प्रेस। वह 300 यूनिट कभी खर्च ही नहीं कर सकता। उसे भाजपा सरकार की 125 यूनिट से पहले ही लाभ मिल रहा है। 


कपूर ने कहा की चुनाव के समय कांग्रेस ने सबको 300 यूनिट का वादा किया था, लेकिन अब पात्र BPL परिवारों की संख्या 70% घटा दी गई है। जब अति गरीब का BPL सर्वे में कोई ठोस मापदंड ही नहीं है, तो 1 लाख परिवारों का आंकड़ा बजट में बोलना केवल एक "कोरा झूठ" है।

"गरीब का खून चूसने वाला बजट"है।  


सेस के नाम पर लूट

सरकार द्वारा डीजल-पेट्रोल पर ₹5 तक का उपकर (Cess) लगाने की तैयारी पर कपूर ने सीधा हमला बोला है । दूध के दाम 10 रुपये बढ़ने से महंगाई का डबल डोज मुख्यमंत्री ने हिमाचल की जनता को दिया है। 


कपूर ने कहा की आंगनबाड़ी और आशा वर्करों आदि मेहनती कर्मचारियों के मानदेय में ₹500 बढ़ाकर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन तेल की कीमतें बढ़ाकर , दूध के दाम 10 रुपये बढ़ कर उनसे महीने के ₹1200 वापस छीन लेनी की स्कीम बजट में सुख्खू ले कर आये है। 

 वैट (VAT) में किसी भी नाम से की गई बढ़ोतरी अंततः जनता की जेब ही काटेगी। यह बजट विधवाओं और अनाथ बच्चों के कल्याण के नाम पर आम आदमी का तेल निकालने की साजिश है।


त्रिलोक कपूर ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष की देहरा और नादौन वाली वायरल टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह बजट पूरे हिमाचल का नहीं, बल्कि चुनिंदा क्षेत्रों का है। प्रदेश के अन्य हिस्सों की अनदेखी इस बजट के हर पन्ने पर साफ झलकती है।


त्रिलोक कपूर ने साफ किया कि यह बजट "आम आदमी का नहीं, बल्कि आंकड़ों की बाजीगरी और जनता को ठगने का दस्तावेज है।"

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