प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय रिवालसर में मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) स्मृति दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया

 प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय रिवालसर में मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) स्मृति दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया


रिवालसर : अजय सूर्या /

 प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, रिवालसर सेवा केन्द्र में आज ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका एवं आध्यात्मिक जगत की महान विभूति मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का स्मृति दिवस श्रद्धा, सम्मान और आध्यात्मिक उमंग के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारी भाई-बहनों के साथ-साथ स्थानीय गणमान्य भाई-बहनों ने भी भाग लेकर मम्मा जी के आदर्श जीवन को नमन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ ईश्वरीय स्मृति और राजयोग मेडिटेशन के साथ हुआ। उपस्थित सभी भाई-बहनों ने मम्मा जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर बी.के. ओमी दीदी जी ने मम्मा के त्याग, तपस्या, सादगी, मधुरता और सेवा भावना से परिपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने अपने श्रेष्ठ संस्कारों और दिव्य गुणों से लाखों लोगों के जीवन में आध्यात्मिक जागृति का प्रकाश फैलाया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके सुनीता दीदी ने कहा कि मम्मा जी का सम्पूर्ण जीवन ईश्वरीय आज्ञाओं के पालन, आत्मिक स्थिति और निस्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने बताया कि मम्मा जी ने अपने जीवन द्वारा यह सिद्ध किया कि निरंतर ईश्वर स्मृति और श्रेष्ठ कर्मों से मनुष्य अपने जीवन को महान बना सकता है। आज भी उनके जीवन के आदर्श सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

बीके सोमा बहन ने अपने संबोधन में कहा कि मम्मा जी ने महिलाओं के सशक्तिकरण, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जीवन हमें विनम्रता, सहनशीलता और सच्ची आध्यात्मिकता का संदेश देता है।

कार्यक्रम के दौरान मम्मा जी के जीवन पर आधारित विशेष अनुभव, गीत और प्रेरणादायक प्रसंग भी सुनाए गए। उपस्थित भाई-बहनों ने मम्मा जी के बताए मार्ग पर चलने तथा अपने जीवन में दिव्य गुणों को धारण करने का संकल्प लिया।

स्थानीय लोगों ने भी कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया और ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा समाज में किए जा रहे आध्यात्मिक एवं नैतिक जागरण के कार्यों की सराहना की। सभी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में शांति, सद्भावना और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति, मानव कल्याण एवं समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सामूहिक योग एवं प्रार्थना कर सभी को प्रसाद वितरित किया गया। पूरा वातावरण आध्यात्मिकता, श्रद्धा और ईश्वरीय स्मृति से ओत-प्रोत रहा।

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