अब अकेले नहीं हैं निराश्रित बच्चे, सरकार निभा रही माता-पिता की भूमिका
अब अकेले नहीं हैं निराश्रित बच्चे, सरकार निभा रही माता-पिता की भूमिका
सरकार के स्नेह से बढ़ा बच्चों का विश्वास, सुख आश्रय योजना से बदल रही जिंदगी
हर बच्चे की पहली सीख उसके माता-पिता से ही शुरू होती है। माता-पिता अपने बच्चों की हर जरूरत को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं। लेकिन यह सौभाग्य सभी बच्चों को प्राप्त नहीं होता। प्रदेश में अनेक ऐसे बच्चे हैं, जिनके सिर से बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाता है।
ऐसे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अभिनव पहल करते हुए कानून बनाया है, जिसके तहत निराश्रित बच्चों को चिल्ड्रन आॅफ स्टेट का दर्जा प्रदान किया गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से सरकार इन बच्चों के अभिभावक की भूमिका निभा रही है। सरकार न केवल उनकी शिक्षा और पालन-पोषण का पूरा खर्च वहन कर रही है, बल्कि उन्हें जेब खर्च, भ्रमण और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करवा रही है, ताकि उन्हें कभी यह महसूस न हो कि उनके माता-पिता उनके साथ नहीं हैं।
वर्तमान राज्य सरकार इस पहल के अंतर्गत प्रदेश के इन बच्चों की 27 वर्ष की आयु तक शिक्षा, पालन-पोषण और अन्य आवश्यकताओं का ध्यान रखती है। इसके अतिरिक्त, उन्हें नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग तथा अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध करवाई जा रही है।
इस योजना के तहत अनाथ बच्चों, निराश्रितों तथा एकल महिलाओं को विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रावास सुविधा तथा शिक्षा के लिए एक लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। विद्यार्थियों को जेब खर्च के रूप में प्रतिमाह 4 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। साथ ही, बच्चों के लिए पिकनिक तथा शैक्षणिक भारत भ्रमण का भी प्रावधान है। इसके साथ ही स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पात्र विद्यार्थियों को स्टार्ट-अप स्थापित करने के लिए दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। जबकि शादी के लिए छात्रों को दो लाख तक का अनुदान भी दिया जा रहा है और घर बनाने हेतु अनाथ बच्चो को तीन बिस्वा जमीन दी जाती है, जिसमे वह आजीवन कभी भी मकान बना सकते है। 18 वर्ष से ऊपर के बच्चो को छात्रावास और कोचिंग हेतु एक लाख की धनराशि प्रत्येक साल दी जा रही है।
यह योजना न केवल निराश्रित बच्चों को सुरक्षा और सम्मान प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर एवं उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ने का अवसर भी दे रही है।
सुख आश्रय योजना की लाभार्थी धर्मशाला के दाड़ी गांव की रहने वाली दीक्षा कहती हैं कि है “बचपन में ही मेरे माता-पिता का निधन हो गया था। हमारे परिवार में मैं, मेरा बड़ा भाई और मेरी दादी हैं। दादी जी काफी समय से बीमार हैं और बिस्तर पर ही रहती हैं, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी हम पर है। हमारी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी और हमारे पास रहने के लिए भी उचित घर नहीं था। जब हिमाचल प्रदेश में वर्तमान सरकार बनी, तब हमें मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद हमने योजना के तहत आवेदन किया और हमें मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता से हमने अपने पुराने घर की मरम्मत करवाई तथा दो नए कमरे भी बनवाए। आज इसी घर में मैं, मेरा भाई और मेरी दादी सुरक्षित और सम्मानपूर्वक रह रहे हैं। पहले हमारे पास रहने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित मकान नहीं था, लेकिन सुख आश्रय योजना ने हमारी जिंदगी बदल दी। मैं हिमाचल प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु का तहेदिल से धन्यवाद करती हूं।
वहीं योजना का लाभ प्राप्त करने वाले धर्मशाला के पास्सू के अमित कुमार कहते हैं कि “मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू जी के द्वारा शुरू की गई सुख आश्रय योजना उन बच्चों और युवाओं के लिए एक बड़ी सहायता साबित हो रही है। मैंने घर निर्माण के लिए इस योजना के तहत आवेदन किया और मुझे सुख आश्रय योजना के तहत पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। इस आर्थिक सहायता से मैंने अपने घर के चार कमरों का निर्माण कार्य शुरू किया है।”
इसी प्रकार जिला कांगड़ा के धर्मशाला के समीप रजोल की रहने वाली जयंतिका कहती हैं कि ”हम दो भाई-बहन हैं। बचपन में ही हमारे माता-पिता का निधन हो गया था, जिसके कारण हमें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उस समय हमारे पास रहने के लिए अपना घर भी नहीं था। जब हिमाचल प्रदेश में माननीय मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खु की सरकार बनी, तब हमें मुख्यमंत्री सुखआश्रयम योजना के बारे में जानकारी मिली। यह योजना उन बच्चों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर आई है, जिनके माता-पिता नहीं हैं। हमें ऐसा महसूस हुआ कि सरकार ने वास्तव में ऐसे बच्चों के लिए अभिभावक की भूमिका निभाई है। सुख-आश्रय योजना के तहत आवेदन स्वीकृत होने के बाद हमें आर्थिक सहायता प्राप्त हुई, जिससे हम अपना घर बनाने में सफल हुए। आज मैं और मेरा भाई अपने नए घर में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक रह रहे हैं। इसके लिए हम मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जी का हृदय से धन्यवाद करते हैं।”
जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) अशोक शर्मा बताते हैं मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के अंतर्गत जिला कांगड़ा में इस वर्ष मई माह तक 27 वर्ष तक की आयु के 719 बच्चों को सामाजिक सुरक्षा के रूप में लगभग 57 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, टोंग लेन ट्रस्ट में रह रहे लगभग 200 बच्चों को भी मई माह तक सामाजिक सुरक्षा मद के तहत 6.25 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। इन बच्चों को प्रतिमाह 500 रुपये का उत्सव भत्ता भी प्रदान किया जा रहा है। वहीं, गृह निर्माण सहायता के लिए इस वर्ष अब तक 36 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन्हें प्रति लाभार्थी 3 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। इसके तहत प्रथम किस्त के रूप में प्रत्येक लाभार्थी को 1-1 लाख रुपये की राशि जारी कर दी गई है। इसके अलावा जिला में दो चिल्ड्रन आॅफ स्टेट को गृह निर्माण के लिए भूमि भी उपलब्ध करवाई गई है।
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा कहते हैं कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना माननीय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की एक अभिनव और संवेदनशील पहल है, जो समाज के प्रति उनके मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है। इस योजना का उद्देश्य उन बच्चों को सुरक्षा, सम्मान और अवसर प्रदान करना है, जिनके माता-पिता नहीं हैं अथवा जो किसी कारणवश पारिवारिक संरक्षण से वंचित हैं। राज्य सरकार ने ऐसे बच्चों को केवल सहायता का पात्र नहीं माना, बल्कि उन्हें चिल्ड्रन आॅफ स्टेट का दर्जा देकर यह संदेश दिया कि सरकार ही उनके अभिभावक की भूमिका निभाएगी। इसके लिए सभी पात्र बच्चों को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर चिल्ड्रन आॅफ स्टेट प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए हैं। इस प्रमाण-पत्र के आधार पर बच्चों की विभिन्न आवश्यकताओं का ध्यान रखा जा रहा है। जिन बच्चों को आवास की आवश्यकता है, उन्हें घर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। जिनके पास भूमि नहीं है, उन्हें भूमि उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक बच्चों की फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों का वहन सरकार कर रही है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक बच्चे को 4 हजार रुपये प्रतिमाह पाॅकेट मनी के रूप में भी प्रदान किए जा रहे हैं।
उपायुक्त कहते हैं कि इस योजना का मूल उद्देश्य समाज के उस वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना है, जिसकी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है। मुख्यमंत्री जी ने ऐसे बच्चों की आवश्यकताओं को समझते हुए उन्हें सम्मानजनक जीवन, बेहतर शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और समाज में एक सशक्त पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है। हमें प्रसन्नता है कि जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इस योजना का प्रभावी और सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। 27 वर्ष तक की आयु के सभी पात्र चिल्ड्रन आॅफ स्टेट को योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जा रहा है। ये बच्चे किसी की दया के पात्र नहीं हैं, बल्कि राज्य सरकार के अपने बच्चे हैं और सरकार उनके सर्वांगीण विकास, शिक्षा, सुरक्षा तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार उनके शारीरिक, मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है।

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