200 मीटर क्षतिग्रस्त रेल ट्रेक चार साल में ठीक नहीं हो पाया ढिंढोरा पीट रहे हैं ब्रांड गेज का
200 मीटर क्षतिग्रस्त रेल ट्रेक चार साल में ठीक नहीं हो पाया ढिंढोरा पीट रहे हैं ब्रांड गेज का
( नूरपुर : विनय महाजन )
नूरपुर बुद्धिजीवियों का कहना है कि कहा कि जब काँगड़ा वैली मे ट्रेनें ही नहीं चल रहीं तो अमृत योजना के तहत स्टेशन बनाने का क्या औचित्य है। यह जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान एक आश्वासन है। बुद्धिजीवियों ने आज एक भेंट वार्ता में यह आरोप लगाया कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही कांगड़ा घाटी की रेल व्यवस्था लगातार बदहाल होती चली गई जिसमें जनता को सिर्फ आश्वासन ही मिले आजदिन तक l आम जनता को आज भी महंगाई के दौर में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बुद्धिजीबीयो का यहभी का कहना है कि 2014 के बाद से कांगड़ा घाटी की नैरो गेज रेल सेवा पूरी तरह बदहाल हो चुकी है, जिससे आम लोगों, छात्रों, मरीजों और कारोबारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेल मंत्री संसद में केवल आश्वासन देते आए हैं, लेकिन आज तक जमीन पर कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आया। 2014 से पहले कांगड़ा रेल वाली जनता में एक लोकप्रिय रेल सेवा थीlउन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आज तक धरातल पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। रेल मंत्री व सांसद केवल लोकसभा में आश्वासन देते नजर आए, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल उल्टी हैl इस मामले मे बुद्धिजीवियों ने रेल मंत्री से आग्रह किया कि वे स्वयं कांगड़ा घाटी का दौरा कर जमीनी हालात का निरीक्षण करें संसद में आश्वासन न दे ताकि सच्चाई का धरातल पर पता लगा सके l भारत जोड़ो एवं लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य पीसी विश्वकर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि वे दिल्ली में केंद्रीय नेताओं से बार-बार मिलने जाते हैं, लेकिन क्या उन्होंने कभी कांगड़ा रेल वैली की वर्षों पुरानी समस्या को गंभीरता से उठाया? उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन और सरकार की नीतियों की आलोचना तो की जाती है, लेकिन कांगड़ा रेल मुद्दे पर चुप्पी क्यों? उधर क्षेत्रवासियों का कहना है कि सिर्फ 200 मीटर का क्षतिग्रस्त रेल ट्रैक चार वर्षों में भी ठीक नहीं हो पाया, जबकि 30 हजार करोड़ रुपये के ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट का ढोल पीटा जा रहा है। हकीकत यह है कि धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांगड़ा रेल ट्रैक विश्व धरोहर की वेटिंग लिस्ट में है, जिसका स्टेटस फिलहाल बदला नहीं जा सकता। बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि हम कांगड़ा चंबा लोकसभा सांसद डॉ राजीव भारद्वाज का आभार प्रकट करते हैं कि उन्होंने इस मुद्दे को लोकसभा में रखा लेकिन धरातल पर अभी कोई परिणाम नजर नहीं आया l रेल विभाग जॉब चक्की पुल का निर्माण कर चुका है तो फिर ट्रेन पठानकोट के लिए क्यों नहीं रवाना हो रही है यह आम प्रश्न जनता की जुबान पर चर्चित है l


State government se karwa lo fir
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