हौरि देवी कोऑपरेटिव सोसाइटी के चुनाव विवादों में, सचिव पर निष्पक्षता भंग करने के गम्भीर आरोप

हौरि देवी कोऑपरेटिव सोसाइटी के चुनाव विवादों में, सचिव पर निष्पक्षता भंग करने के गम्भीर आरोप

फतेहपुर: बलजीत ठाकुर 

हौरि देवी कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर सर्विस सोसाइटी लिमिटेड (जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश) में निदेशक मंडल/ प्रबंधन समिति के चुनावों को लेकर विवाद गहरा गया है। सोसाइटी के कई सदस्यों ने सचिव पर निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सफलता से दूर है पारदर्शिता

निर्वाचन कार्यक्रम के तहत, 8 अक्टूबर 2025 को वोटर लिस्ट को सार्वजनिक किया जाना था, ताकि सभी सदस्य अपनी आपत्तियां अथवा सुझाव दे सकें। लेकिन, न तो वोटर लिस्ट नोटिस बोर्ड पर चस्पा की गई और न ही समाज को उपलब्ध करवाई गई। मीडिया प्रतिनिधियों का भी कहना है कि सचिव ने स्पष्ट तौर पर कहा कि लिस्ट बनी ही नहीं है, जबकि यह प्रक्रिया चुनाव नियमों के तहत तय तिथि पर पूरी होनी थी।

सचिव के व्यवहार पर उठे सवाल

समाज के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि सचिव आज ड्यूटी से भी नदारद रहा, ताकि वह जवाबदेही से बच सकें। यह भी आरोप है कि सचिव केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। जिन प्रक्रियाओं की सार्वजनिक रूप से आवश्यकता है, उन्हें टाला जा रहा है और सचिव अपने करीबी लोगों को समिति में बिठाने के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता की अवहेलना कर रहे हैं।

 नियमों के उल्लंघन की आशंका

हिमाचल प्रदेश कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत, चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और पूर्वघोषित कार्यक्रम के अनुसार होनी चाहिए। वोटर लिस्ट प्रकाशित करना एवं उसे सार्वजनिक करना समिति की जिम्मेदारी है। इस प्रकार की गोपनीयता और जानबूझकर की गई ढिलाई, चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह लगाती है और स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

 सदस्य एवं अभ्यर्थी असमंजस में

इन घटनाओं से कई अभ्यर्थी और सामान्य सदस्य असमंजस में हैं कि वे समय रहते नामांकन दाखिल कर भी पाएंगे या नहीं। समाज के लोगों ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि निष्पक्ष चुनाव और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, अन्यथा यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर धब्बा होगा।

इस बाबत स्थानीय युवाओं से जब बात हुई तो उन्होंने कहा कि यदि चुनाव नियमों को दरकिनार किया गया तो सोसाइटी के ख़िलाफ़ कोर्ट का दरबाजा खटखटाया जाएगा।

नियमों की अनदेखी और कानूनी दायित्व

हिमाचल प्रदेश कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट 1968 एवं को-ऑपरेटिव सोसाइटीज रूल्स 1971 के नियम 37 व 38 के अनुसार, वर्तमान कमेटी की जिम्मेदारी है कि वह चुनाव प्रक्रिया का समय पर और पारदर्शिता से संचालन सुनिश्चित करे। वोटर लिस्ट प्रकाशित करना तथा प्रक्रिया का खुलासा करना कानूनन अनिवार्य है; उसकी अवहेलना पर चुनाव अमान्य घोषित हो सकते हैं। अपराध और सजाकोऑपरेटिव अधिनियम के तहत कोई भी अधिकारी, सदस्य या कर्मचारी, जो जानबूझकर झूठी सूचना देता है, दस्तावेज़ों को रोकता या छुपाता है, या किसी भी समिति प्रक्रिया को बाधित करता है, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और आर्थिक दंड लग सकता है। उदाहरणस्वरूप:झूठी सूचना, या दस्तावेज/रिकॉर्ड न दिखाने पर 200 रु. जुर्माना।चुनाव सम्बन्धी आदेश/निर्देश की अनदेखी पर दंड का प्रावधान।यदि सचिव या अधिकारी ने जानबूझकर कर्मों/निर्देशों की अवहेलना की, तो समिति उसे पद से निलंबित/हटाने की सिफारिश कर सकती है।बार-बार नियम उल्लंघन पर, रजिस्ट्रार कमेटी भंग कर सकते हैं।

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