लक्ष्मीनाथ मंदिर के शहनाई और नगाड़ा वादकों के मानदेय का मुद्दा उठा
लक्ष्मीनाथ मंदिर के शहनाई और नगाड़ा वादकों के मानदेय का मुद्दा उठा
डॉ. राजेश सहगल ने प्रशासन से पारंपरिक कलाकारों के मानदेय में वृद्धि की मांग की
चंबा : जितेन्द्र खन्ना /
चंबा। लक्ष्मीनाथ मंदिर में आरती और पूजा के दौरान शहनाई एवं नगाड़ा वादन की सदियों पुरानी परंपरा को बनाए रखने वाले पारंपरिक कलाकारों की आर्थिक स्थिति का मुद्दा सामने आया है। पुरातत्वविद एवं स्थानीय निवासी डॉ. राजेश सहगल ने जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन से इन कलाकारों के मानदेय पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है।
डॉ. सहगल के अनुसार लक्ष्मीनाथ मंदिर में शहनाई और नगाड़ा वादन केवल संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मंदिर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उनके अनुसार रियासत काल से ही विभिन्न आरतियों और पूजा के अवसरों पर इन वाद्य यंत्रों के वादन की परंपरा चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि मंदिर में मंगल आरती, श्रृंगार आरती, भोग आरती, संध्या आरती और शयन आरती के दौरान शहनाई तथा नगाड़े का वादन किया जाता है। भारतीय मंदिर परंपरा में अलग-अलग समय और अवसरों के अनुरूप संगीत एवं वाद्य वादन का विशेष महत्व माना जाता रहा है।
डॉ. सहगल ने दावा किया कि वर्तमान में मंदिर में सेवा देने वाले शहनाई और नगाड़ा वादकों को प्रतिदिन करीब 50 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से मेहनताना मिल रहा है। उनके अनुसार दिन में पांच बार वादन की सेवा देने के बावजूद यह राशि लगभग 1,500 रुपये मासिक बैठती है। उन्होंने कहा कि इतनी कम राशि में कलाकारों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है।
उन्होंने यह भी कहा कि बदलते समय में पारंपरिक वाद्य कलाकारों के सामने रोजगार के अवसर कम हुए हैं। शादियों और अन्य आयोजनों में डीजे तथा आधुनिक संगीत साधनों के बढ़ते चलन के कारण शहनाई और नगाड़ा वादकों की मांग भी प्रभावित हुई है। आर्थिक कठिनाइयों के चलते नई पीढ़ी के पारंपरिक कला से दूर होने की आशंका भी बनी हुई है।
डॉ. सहगल ने कहा कि उन्होंने मंदिर में सेवा देने वाले वादकों की समस्याओं को लेकर मंदिर अधिकारी के समक्ष कई बार उनकी मांगें रखने का प्रयास किया, लेकिन अभी तक अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है।
उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया तथा नवनियुक्त मंदिर ट्रस्ट सदस्यों से आग्रह किया कि लक्ष्मीनाथ मंदिर के शहनाई और नगाड़ा वादकों के मानदेय पर पुनर्विचार कर उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक उपलब्ध करवाया जाए, ताकि मंदिर की इस पारंपरिक सेवा को भविष्य में भी जारी रखा जा सके।
— डॉ. राजेश सहगल, पुरातत्वविद एवं स्थानीय निवासी, चंबा

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