हिमाचल में रोजगार पर सियासत नहीं, रोजगार सृजन के लिए ठोस नीति चाहिए : मनजीत डोगरा
हिमाचल में रोजगार पर सियासत नहीं, रोजगार सृजन के लिए ठोस नीति चाहिए : मनजीत डोगरा
सरकारी नौकरियों की संख्या गिनाने से खत्म नहीं होगी बेरोजगारी, हाइड्रो, पर्यटन, बागवानी, कृषि और प्राकृतिक संसाधनों को रोजगार का आधार बनाना होगा
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के भीतर तथा बाहर पिछले दो दिनों से बेरोजगारी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जिस तरह का राजनीतिक टकराव चल रहा है, उसने प्रदेश की सबसे गंभीर समस्या को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष सरकार को उसके चुनावी वादे—एक वर्ष में एक लाख और पांच वर्ष में पांच लाख रोजगार—की याद दिला रहा है, जबकि सत्ता पक्ष अपने स्तर पर रोजगार देने के आंकड़े गिना रहा है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि दोनों पक्षों की बहस अभी तक उस मूल सवाल तक नहीं पहुंच पाई है कि हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष हजारों-लाखों युवाओं के लिए नए और स्थायी रोजगार के अवसर पैदा कैसे हों ? किसान नेता एवं समाजसेवी मनजीत डोगरा ने कहा कि
यह बात अब राजनीतिक दलों को समझनी होगी कि हिमाचल जैसे छोटे और सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी राज्य में केवल सरकारी क्षेत्र के भरोसे बेरोजगारी का समाधान संभव नहीं है। सरकार यदि आज सभी खाली सरकारी पदों को भर भी दे, तब भी प्रदेश के हर बेरोजगार युवा को रोजगार नहीं मिल सकता। इसलिए विधानसभा में रोजगार पर बहस “किसने कितनी नौकरियां दीं” तक सीमित रखने के बजाय “अगले दस वर्षों में हिमाचल में रोजगार के लाखों नए अवसर कैसे पैदा किए जाएं” पर होनी चाहिए।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हिमाचल के राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय प्रदेश की Employment Generation Policy पर सर्वदलीय चर्चा करें।
हिमाचल के पास रोजगार पैदा करने की अपार संभावनाएं हैं। हमारे पास जल संसाधन हैं, पर्यटन है, बागवानी है, कृषि है, वन संपदा है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था है, हस्तशिल्प तथा समृद्ध लोक संस्कृति है । जरूर केवल इस बात की है की इन संसाधनों को सरकारी नीति के साथ जोड़ते हुए एक व्यापक रोजगार सृजन की नीति बनाई जाए जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जा सके ।
जारी करता
मनजीतडोगरा
किसान नेता एवं समाजसेवी
पंचरुखी हिमाचल प्रदेश ।

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