प्रदेश के ऐतिहासिक भरमाड़ के शिब्बो थान मंदिर में लगे वेल और बेरी के वृक्ष आज भी कांटों से मुक्त हैं

 प्रदेश के ऐतिहासिक भरमाड़ के शिब्बो थान  मंदिर  में लगे वेल  और बेरी के वृक्ष आज भी कांटों से मुक्त हैं   


         (नूरपुर:-विनय महाजन)                     

             प्रदेश के उपमंड़ल ज्वाली के अर्तगत पंचायत भरमाड में स्थित मन्दिर सिद्ध वावा शिब्बो थान में 10 अगस्त से शिब्बो थान परम्परा के अनुसार मनाये जाने वाले नव दिवसीय गोगा नवमी  पर्व  को दैविक  अनुष्ठान के साथ मनाये जा रहे हैंl  बाबा शिब्बो गौगावीर के परम प्रिय शिष्य है जिन पर गोगावीर की कृपा सदैव रहती है । प्रदेश मे  शिब्बो थान गौगावीर का एक मात्र ऐसा मन्दिर है जो उनके भक्त शिब्बो के नाम पर है यहां जहरवीर की पूजा बाबा शिब्बो के नाम से होती है हिमाचल प्रदेश  देवभूमि है हिमाचल प्रदेश  में सबसें प्राचीन एवं श्रद्धा व आस्था के प्रतीक अनगिनत चमत्कारी स्थान एवं देवी देवताओं के मन्दिर है जो प्राकृतिक दैविक एव दिव्य सम्प्रदा से सशोभित हैं जहां श्रद्धालु नतमस्तक होकर दैविक शांति को प्राप्त करते हैं । हिमाचल प्रदेश में कुछे एक ऐसे सुप्रसिद्ध नाग मन्दिर है जहां जंगली व विषैले सर्पो के विष का निवारण होता है लेकिन इसमें सिद्ध बाबा शिब्बो थान का अपना अलग महत्व है । इस मंदिर की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें बेरी के वृक्ष पर कांटे नहीं है    यह ऐतिहासिक मंदिर लगभग पठानकोट से 40 कि.मीटर व ज्वाला मुखी से 60 किलो मीटर  और कांगडा से 65 किलोमीटर व गगल एयरर्पोट से 45 किलोमीटर व पौंग बांध से 38 किलोमीटर दूर भरमाड - रैहन सर्म्पक मार्ग के किनारे एवं कांगडा घाटी रेलवे मार्ग के स्टेशन  भरमाड से 150 मीटर की दूरी पर जिला कांगडा की ज्वाली तहसील के गांव भरमाड में स्थित है। भारत में सिद्ध शिब्बो बाबा थान एक मात्र ऐसा जहरवीर गोगा का स्थान है जहां उनकी आराधना बाबा शिब्बोथान के नाम से होती हैl इस अवसर पर  महन्त हेम राज, महन्त रविन्द्र नाथ व  महन्त राम प्रकाश वत्स ने मन्दिर के प्राचीन इतिहास की जानकारी देते हुए बताया की वावा जी शिब्बो जी का जन्म 1244 लगभग ंसिद्धपुरघाड नामक स्थान पर हुआ । इनके दो भाई व एक छोटी वहन शिव्वा थी । बाबा शिब्बो  वचपन से अपंग थे और सदा भगवान की भक्ति में लीन रहते थे l आज भी सिद्ध पुर घाड में माता शिव्वा देवी का मन्दिर बना हुआ है l मगंल कार्य के उपरान्त लोग कुल देवी के मन्दिर में जाकर अपनी मनत चढाते है । वहन के सती होने के वाद शिव्वो के मन में वैराग पैदा हो गया वचपन से उन्हे पूर्व जन्म का ज्ञान था । अव उनकी तपस्य का समय आ चुका था । उन्होने रात के समय अपना घर का त्याग कर भरमाड के घने जंगलों में आ गए । रात के समय घनघोर जंगल में उन्हे शिव लिंग आकार का  दिखाई दिया शिव्वो  वहीं तपस्य करने बैठ गए और अपने ईष्ट देव के ध्यान में लीन हो गए। शक्ति पुंज के पास बैठ कर वावा शिव्वो ने कई साल तक तप किया । तपस्या का प्रभाव  तीनों लोकां में फैल  गया । बाबा शिब्बो घोर तपस्या  से भगवान शिव प्रसन्न हो गए । तभी शिव ने गोगावीर  का रूप धारण कर शिव  मानव लील करते हुए अपनी मंडली के साथ आकाश  पर विचरण करने लगे  । तत्काल एक दम उनका नील अश्व वाहन  रूक गया बार बार प्रयत्न करने पर अश्व  टस से मस नही हो रहा था । जव जहरवीर ने अपने दिव्य दष्टि से देखा कि वामी के बीच से  ओंम  जहरवीराय नमः की ध्वनी गुजयमान है । उनका भक्त विष लिंग के पास उनकी तपस्या  में लीन है और भक्ति का प्रकाश उनके चारों और फैला हुआ है  सभी देव गण वडे हर्षित हुए और फूलो की बिछौर करने लगे । अपने भक्त की मनोकामना की पूर्ति के लिए  जहरवीर अपनी देव मंडली सहित आकाश से धरती पर उतरे और वावा शिब्वो को  पुकारा भक्त मेैं तेरी तपस्या  के वशीभूत  होकर  तूझे मनचाहा वरदान देने आया हूं जो मन में इच्छा  है वर मांगो जैसे  ही जहरवीर के चरणों को बाबा शिब्बो ने स्पर्श किया त्ंयो ही वह अपंगपन से मुक्त हो गए और 12 साल की आयु को प्राप्त हो गए । मेरे दरवार आने वाले हर प्राणी जहर व व्याधि से मुक्त हो । जो मेरे दरवार पर नही आ सकता उसका क्या उपचार होगा । जिस स्थान पर बैठ का तूने मेरे साथ चारपासा खेला है उस स्थान की मिटटी को पुजारियो द्धारा वताई गई विधि अनुसार जो भी प्रयोग करेगा वह भी देश - विदेश  में जहर से मुक्त होगा । मेरे दरवार पर आने वाले हर प्राणी की समस्त मनोकामना पूर्ण हो l यह स्थान तेरेे नाम सिद्ध बाबा शिब्बो थान के नाम से विख्यात होगा  व मेरी पूजा तेरे नाम से होगी एवं तेरे दरवार में आने वाले हर प्राणी की हर मनोकामना पूर्ण होगी । इस पर भी मै अपने वरदानों की प्रमाणिकता के लिए तेरे दरवार दो विल और वेरी के वृक्ष है इन्हे में कांटों से मुक्त करता हूं । इन दोना बृक्षो के  दर्शन मात्र से संक टो से मुक्ति मिलेगी।अंत में  जाहरवीर गोगा जी(जहरवीर गोगा को हिन्दू वीर व मुसलमान पीर कहते है) ने बाबा शिब्बो को अपना दिव्य विराट रूप दिखाया और इसी दिव्य रूप में शिब्बो स्थान पर स्थिर हो गए

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