ज्वाली में एससी/एसटी विकास निधि कानून की मांग: मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन
ज्वाली में एससी/एसटी विकास निधि कानून की मांग: मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन
ज्वाली (कांगड़ा)
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून के निर्माण की मांग को लेकर आज ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा एक रोष रैली निकाली गई। इसके पश्चात मिनी सचिवालय मैदान में धरना प्रदर्शन किया गया और उपमंडलीय दंडाधिकारी (SDM) ज्वाली के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया।
प्रमुख मांगें
कानून का निर्माण: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और राजस्थान की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी एससी/एसटी विकास निधि कानून तुरंत बनाया जाए।
जनसंख्या के अनुपात में बजट आवंटन: राज्य के कुल योजना बजट में से अनुसूचित जाति (लगभग 33%) और अनुसूचित जनजाति (लगभग 8%) की जनसंख्या के अनुपात में अनिवार्य रूप से बजट आवंटित किया जाए।
पारदर्शी उपयोग: आवंटित राशि का पारदर्शी और जवाबदेह उपयोग केवल एससी/एसटी वर्ग के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए सुनिश्चित किया जाए।
भूमि आवंटन: प्रदेश के भूमिहीन परिवारों को आवासीय एवं कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराई जाए।
कांग्रेस अनुसूचित प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष के आरोप
इस दौरान कांग्रेस अनुसूचित प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रघुबीर भाटिया ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 5 वर्षों में एससी/एसटी विकास के लिए बजटीय आवंटन घटकर मात्र 5% तक सीमित रह गया है, जबकि जनसंख्या अनुपात के लिहाज से यह 33% होना चाहिए था। उन्होंने यह भी बताया कि यह अल्प राशि भी अपने वास्तविक उद्देश्यों पर खर्च नहीं हो पा रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि राज्य सरकार ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र तथा अहमदाबाद में आयोजित "न्याय पथ" सम्मेलन के दौरान इस कानून को पारित करने का वादा किया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

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