दिखावे की गौसेवा पर मंत्री चंद्र कुमार की दो टूक, बोले—पहले घर में गाय पालो

 दिखावे की गौसेवा पर मंत्री चंद्र कुमार की दो टूक, बोले—पहले घर में गाय पालो


नूरपुर : विनय महाजन /

जिला कांगड़ा के ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के सिद्धपुरघाड़ में आयोजित 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव के दौरान कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने गौसेवा और गौ संरक्षण को लेकर स्पष्ट टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केवल दिखावे के लिए गौसेवा करने या स्वयं को गौसेवक बताने से गायों का संरक्षण संभव नहीं है। इसके लिए धरातल पर उतरकर जिम्मेदारी निभानी होगी।


मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि जब वह गौशालाओं का दौरा करते हैं तो वहां कई बार गायों की स्थिति देखकर उन्हें दुख होता है। कुछ गायें बीमारी और पर्याप्त भोजन के अभाव में परेशान दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण केवल भाषणों और दावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गायों की वास्तविक देखभाल के लिए समाज को आगे आना होगा।


उन्होंने गौसेवा का दावा करने वालों से सवाल करते हुए कहा कि जो लोग स्वयं को गौसेवक बताते हैं, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने अपने घर में कितनी गायें पाल रखी हैं। मंत्री ने कहा कि जब एक गाय को घर में पालने और उसकी देखभाल करने की जिम्मेदारी उठाने में लोग पीछे हटते हैं, तो केवल गौसेवा का दावा करने का कोई औचित्य नहीं है।


उन्होंने कहा कि “बहुत से लोग गौसेवक बनते हैं और गौसेवा की बातें करते हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि उन्होंने अपने घर में कितनी गायें पाल रखी हैं? एक गाय घर में पालने की जिम्मेदारी नहीं लेते, लेकिन गौसेवक बनने का दावा करते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दिखावे से गौ संरक्षण नहीं होगा, बल्कि इसके लिए वास्तविक रूप से जिम्मेदारी निभानी होगी।


मंत्री ने कहा कि गौसेवा का अर्थ केवल नाम या प्रचार तक सीमित नहीं होना चाहिए। गायों की स्थिति को समझते हुए उनके लिए पर्याप्त भोजन, उपचार और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है और इसमें सरकार के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।


उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि यदि वे वास्तव में गौसेवा और गौ संरक्षण के प्रति गंभीर हैं तो आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं। सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना गौ संरक्षण के लक्ष्य को पूरी तरह हासिल करना संभव नहीं है।

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