मेटा का ऐतिहासिक कदम,आधी रात से सुबह 6 बजे तक बैन
मेटा का ऐतिहासिक कदम,आधी रात से सुबह 6 बजे तक बैन, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सख्त नियम और अरबों डॉलर का समझौता
सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल और बच्चों पर इसके पड़ने वाले मानसिक दुष्प्रभावों को रोकने के लिए मेटा (Meta) ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अमेरिकी राज्यों के साथ हुए एक बड़े कानूनी समझौते के बाद कंपनी ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नाबालिगों के लिए कई कड़े सुरक्षा प्रावधानों की घोषणा की है।
इस नई व्यवस्था के तहत बच्चों की डिजिटल आदतें और प्लेटफॉर्म के फीचर्स पूरी तरह बदलने जा रहे हैं।
मुख्य बिंदु एवं नए नियम
आधी रात से सुबह 6 बजे तक बैन (Night-Time Restriction):
बच्चों को नींद की कमी और सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक नाबालिगों (18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स) के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम का एक्सेस प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान वे प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखने या पोस्ट करने से रोकेंगे।
लाइक्स और रिएक्शन काउंट का हटना (Removal of Likes):
नाबालिगों द्वारा शेयर किए गए पोस्ट पर मिलने वाले 'लाइक काउंट' और 'रिएक्शन' को छिपा दिया जाएगा या हटा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों के मन से ऑनलाइन पॉपुलरिटी और सोशल अप्रूवल का मानसिक दबाव कम करना है।
अरबों डॉलर का वित्तीय भुगतान (Billion-Dollar Settlement):
बच्चों को अपनी लत में फंसाने और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने के आरोपों से जुड़े मुकदमों को सुलझाने के लिए मेटा ने लगभग 17 से 18 अरब डॉलर (लगभग शुरुआती और कुल मिलाकर) के भारी-भरकम समझौते पर सहमति जताई है। यह राशि बच्चों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े कार्यों में उपयोग होगी।
दैनिक समय सीमा (Daily Time Limit):
नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर रोजाना इस्तेमाल की एक डिफ़ॉल्ट सीमा (जैसे 2 घंटे प्रतिदिन) तय की जा रही है, हालांकि माता-पिता चाहें तो इसे कंट्रोल या ओवरराइड कर सकेंगे।
स्कूल ऑवर्स में नोटिफिकेशन बंद:
बच्चों की पढ़ाई के दौरान उनका ध्यान न भटके, इसके लिए स्कूल के समय में नोटिफ़िकेशन को म्यूट या बंद रखा जाएगा।
इस बदलाव के पीछे की वजह
हाल के वर्षों में यह बात सामने आई थी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम और फीचर्स (जैसे एंडलेस स्क्रोल और लाइक्स की होड़) बच्चों को मानसिक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। रातभर जागकर रील्स और पोस्ट देखने के कारण बच्चों की दिनचर्या और सेहत पर बुरा असर पड़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालती दबाव और अभिभावकों की चिंता के चलते मेटा को इन कड़े सुरक्षा उपायों को अनिवार्य रूप से लागू करना पड़ा है।

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