लाहौल की 6048 मीटर ऊंची अज्ञात चोटी पर पहली बार फहरा तिरंगा शिखर से पैराग्लाइडिंग कर गिमनर सिंह ने रचा इतिहास

 लाहौल की 6048 मीटर ऊंची अज्ञात चोटी पर पहली बार फहरा तिरंगा


शिखर से पैराग्लाइडिंग कर गिमनर सिंह ने रचा इतिहास


ग्रेटर हिमालय पर्वत श्रृंखला की जांस्कर पर्वतमाला में जिला लाहौल की 6048 मीटर ऊंची अज्ञात चोटी पर दस सदस्यीय पर्वतारोही दल ने सफलतापूर्वक चढ़ाई कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अभियान के दौरान पर्वतारोहण अनुदेशक एवं पैराग्लाइडिंग पायलट गिमनर सिंह ने चोटी के शिखर से पैराग्लाइडिंग कर एक नया इतिहास रचा।

6048 मीटर की चोटी पर सफलतापूर्वक आरोहण करने के बाद उसके शिखर से पैराग्लाइडिंग करना गिमनर सिंह के अदम्य साहस, कौशल और साहसिक प्रतिभा को दर्शाता है। अभियान दल के अनुसार, इस प्रकार की अज्ञात चोटी के शिखर से पैराग्लाइडिंग का यह पहला प्रयास है और इससे गिमनर सिंह ने एक नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है।

दस सदस्यीय दल ने इस चोटी पर पहली बार तिरंगा फहराकर भी महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। यह पर्वतारोहण अभियान भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन के प्रस्तावित अभियान के तहत आयोजित किया गया। गिमनर सिंह ने बताया कि पूरे अभियान को महज पांच दिनों में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

अभियान का आयोजन 22 अगस्त से 26 अगस्त 2026 तक किया गया। अभियान दल का नेतृत्व कर रहे देशराज ने बताया कि वर्तमान में इस चोटी का कोई नाम निर्धारित नहीं किया गया है। अभियान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के बाद जल्द ही चोटी के नामकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि सामान्यतः किसी अज्ञात चोटी पर पहली बार सफलतापूर्वक आरोहण करने वाले दल या व्यक्ति को उसके नामकरण का प्रस्ताव रखने का अवसर मिलता है।

अभियान में पायलट एवं अनुदेशक गिमनर सिंह, लक्ष्य दत्त, राम कुमार, अंकित सिंह, रणजीत ठाकुर, गौरव, सौरव तथा महिला प्रतिभागी केला देवी सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

अभियान दल ने बताया कि जांस्कर पर्वतमाला में पर्वतारोहियों के लिए कई नई संभावनाएं मौजूद हैं। हिमाचल प्रदेश के लाहौल क्षेत्र में 6000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली कई ऐसी चोटियां हैं, जिन पर अभी तक आरोहण नहीं हुआ है। भरतपुर आधार शिविर क्षेत्र से भी लगभग 6100 मीटर ऊंची ऊनम चोटी सहित कई पर्वतारोहण स्थल उपलब्ध हैं।

गिमनर सिंह ने कहा कि लाहौल में नई चोटियों और नए पर्यटन स्थलों की खोज से देश के विभिन्न राज्यों के पर्वतारोहियों और साहसिक पर्यटन में रुचि रखने वाले लोगों को हिमाचल की ओर आकर्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहले कई पर्वतारोही आरोहण के लिए लेह-लद्दाख की ओर जाते थे, लेकिन लाहौल में उपलब्ध नई चोटियां उन्हें हिमाचल प्रदेश में ही पर्वतारोहण के बेहतर अवसर प्रदान कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल नई चोटी पर आरोहण करना नहीं था, बल्कि युवाओं को साहसिक गतिविधियों और पर्वतारोहण के प्रति प्रेरित एवं जागरूक करना भी था । आज की युवा पीढ़ी का लंबे समय तक घरों में रहना उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है। साहसिक गतिविधियां युवाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से भी दूर रखने में मदद मिल सकती है।

अभियान दल ने उम्मीद जताई कि लाहौल की इन नई पर्वतारोहण संभावनाओं से क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

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