पीआर एजेंसी से नहीं सुधरने वाली मुख्यमंत्री की छवि, रथ हो या विमान की फोटो, जनता सच्चाई पहचान चुकी है : बिक्रम सिंह ठाकुर
पीआर एजेंसी से नहीं सुधरने वाली मुख्यमंत्री की छवि, रथ हो या विमान की फोटो, जनता सच्चाई पहचान चुकी है : बिक्रम सिंह ठाकुर
चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले मुख्यमंत्री सुक्खू बताएं—2022 में इसी आयोग से मिली सत्ता को भी गलत मानते हैं क्या
धर्मशाला। पूर्व मंत्री एवं विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी, अब पीआर एजेंसियों के सहारे आपकी छवि नहीं सुधरने वाली। चाहे रथ की फोटो लगाई जाए या विमान की ऑर्डिनरी क्लास की फोटो, जनता अब तस्वीरों के पीछे की वास्तविकता को अच्छी तरह समझ चुकी है। जिस तरह हर तस्वीर में किनारे की जगह तलाशने का प्रयास किया जा रहा है, उसी तरह हिमाचल की जनता भी आपकी सरकार को सत्ता के किनारे लगाने का मन बना चुकी है।
बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सादगी का मुखौटा पहनकर प्रदेश की जनता को भ्रमित करने का प्रयास न करें। करोड़ों रुपये की लागत वाले कार्यालय, महंगी सुविधाएं और सत्ता की चकाचौंध किसी से छिपी नहीं है। मुख्यमंत्री जितनी बार आम आदमी बनने का दिखावा करेंगे, उतनी ही बार जनता के सामने उनकी कथनी और करनी का अंतर उजागर होगा। पीआर एजेंसी तस्वीरें बदल सकती है, लेकिन सरकार की कार्यप्रणाली से परेशान जनता का अनुभव नहीं बदल सकती।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से जनता के बीच जाने और आम लोगों से मिलने का भी खूब प्रचार किया जाता है। बच्चों के बीच फोटो सेशन करवाकर और कुछ चुनिंदा लोगों से मुलाकात की तस्वीरें जारी कर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि मुख्यमंत्री आम जनता के बेहद करीब हैं। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। मुख्यमंत्री जब आम जनता के बीच निकलते हैं तो उनके चारों ओर पुलिस और भारी-भरकम स्टाफ का घेरा रहता है। आम आदमी को उनके नजदीक तक पहुंचने नहीं दिया जाता। यदि मुख्यमंत्री वास्तव में जनता के इतने ही करीब हैं तो फिर जनता और मुख्यमंत्री के बीच इतना बड़ा सुरक्षा एवं स्टाफ का घेरा क्यों है? जनता से दूरी बनाकर और फिर तस्वीरों के माध्यम से नजदीकी का दिखावा करके हिमाचल की जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता।
बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि सबसे हास्यास्पद स्थिति यह है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं, जबकि इसी चुनाव आयोग द्वारा वर्ष 2022 में करवाए गए विधानसभा चुनाव के परिणाम के आधार पर कांग्रेस की सरकार बनी और सुखविंदर सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री जी को प्रदेश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि यदि आज चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल है, तो क्या वर्ष 2022 में इसी आयोग द्वारा करवाया गया चुनाव भी गलत था? यदि 2022 का जनादेश सही था और उसी जनादेश के आधार पर आप मुख्यमंत्री बने, तो आज जब जनता का फैसला आपकी पार्टी के अनुकूल नहीं आ रहा है, तब संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का क्या औचित्य है?
बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र में जनादेश सर्वोपरि होता है। चुनाव में जीत मिले तो जनादेश स्वीकार और हार मिले तो चुनाव आयोग पर सवाल—यह दोहरा मापदंड लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। यदि किसी चुनावी प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस आपत्ति है तो उसके लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाएं निर्धारित हैं। लेकिन संस्थाओं पर राजनीतिक आरोप लगाकर अपनी सरकार की विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में जिस तरह कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता निर्वाचन विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं, नारे लिखे जा रहे हैं और चुनाव आयोग के खिलाफ पुतले जलाए जा रहे हैं, उससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हाल में शिमला में निर्वाचन विभाग कार्यालय के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान कार्यालय की दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
बिक्रम सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यदि उनकी सरकार संवैधानिक संस्थाओं की इतनी ही चिंता करती है, तो सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में इस प्रकार के राजनीतिक प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? सत्ता में बैठकर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना और अपने ही कार्यकर्ताओं के आचरण पर मौन रहना प्रदेश की जनता के सामने सरकार की वास्तविक सोच को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज अपनी ही पार्टी के संगठन और कार्यकर्ताओं के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं। पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों में कांग्रेस को मिले राजनीतिक झटकों पर भी सरकार और संगठन के बीच मंथन चल रहा है। ऐसे समय में अपनी सरकार की नीतियों, कार्यप्रणाली और जनविरोधी फैसलों की समीक्षा करने के बजाय चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करना समस्या का समाधान नहीं है।
बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि जनता की आंखों में धूल झोंकने का समय अब समाप्त हो चुका है। महंगाई, शुल्क वृद्धि, सरकारी व्यवस्थाओं पर बढ़ता बोझ, विकास कार्यों को लेकर जनता की शिकायतें और सरकार के प्रति बढ़ता असंतोष किसी पीआर अभियान से समाप्त नहीं किया जा सकता। जनता तस्वीर नहीं, अपना अनुभव देखती है।
बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री जी, संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले अपनी सरकार के कामकाज का हिसाब प्रदेश की जनता को दीजिए। यह बताइए कि चुनाव आयोग से लेकर जनता के जनादेश तक, आपको कौन-सा परिणाम स्वीकार है और कौन-सा नहीं। लोकतंत्र में सत्ता जनता देती है और जनता ही सत्ता से सवाल भी पूछती है। इसलिए जनादेश को स्वीकार करना और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना ही लोकतांत्रिक मर्यादा है।
उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री जितना चाहें पीआर के माध्यम से अपनी छवि चमकाने का प्रयास कर लें, लेकिन हिमाचल की जनता सरकार की वास्तविकता से परिचित हो चुकी है। रथ की फोटो हो या विमान की, सादगी का प्रचार हो या आम आदमी का मुखौटा—जनता अब तस्वीरों से नहीं, सरकार के काम से फैसला करेगी।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें