जल रक्षकों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद, 12 साल की जगह 8 साल में नियमितीकरण का रास्ता साफ
जल रक्षकों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद, 12 साल की जगह 8 साल में नियमितीकरण का रास्ता साफ
मंडी : अजय सूर्या /
हिमाचल प्रदेश में जल रक्षकों की अनुबंध अवधि को 12 साल से घटाकर 8 साल करने की मांग को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है। सरकार और जल शक्ति विभाग की ओर से प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति के बाद अब जल रक्षकों को आधिकारिक अधिसूचना जारी होने का इंतजार है।
जानकारी के अनुसार, 12 साल की अनुबंध अवधि को घटाकर 8 साल करने का मामला सरकार की नीति से जुड़ा है। इसके लिए विधानसभा में अलग से कानून बनाने की आवश्यकता नहीं बताई जा रही है। कैबिनेट स्तर पर मंजूरी और उसके बाद प्रशासनिक अधिसूचना जारी होने पर नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।
वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार
बताया जा रहा है कि प्रस्ताव जल शक्ति विभाग और सरकार के स्तर पर आगे बढ़ चुका है, लेकिन वित्त विभाग की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। वित्त विभाग प्रस्ताव के लागू होने से सरकार पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय बोझ का आकलन कर रहा है। इसी प्रक्रिया के चलते अधिसूचना जारी होने में समय लग रहा है।
जल रक्षक संघ की ओर से भी इस मांग को लगातार सरकार के समक्ष उठाया जा रहा है। संघ के अनुसार, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से विभिन्न मंचों पर जल रक्षकों को इस संबंध में आश्वासन दिया गया है। हालांकि, अंतिम स्थिति आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
8 साल की सेवा पूरी करने वालों को मिल सकता है लाभ
वर्तमान व्यवस्था के तहत 12 साल की सेवा पूरी करने वाले जल रक्षकों को पंप अटेंडेंट के रूप में आगे लाभ देने की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। यदि प्रस्तावित बदलाव को अंतिम मंजूरी मिलती है और अनुबंध अवधि 8 साल निर्धारित की जाती है, तो 8 साल की सेवा पूरी कर चुके जल रक्षकों के लिए भी आगे लाभ का रास्ता खुल सकता है।
फिलहाल जल रक्षकों की नजर वित्त विभाग की मंजूरी और इसके बाद जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना पर टिकी हुई है। अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संशोधित व्यवस्था किस तारीख से लागू होगी और इसके लिए क्या-क्या शर्तें निर्धारित की जाएंगी।

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