हिमाचल के कृषि क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र ने जारी की ₹64.82 करोड़ की दूसरी किस्त : कृषि मंत्री चंद्र कुमार
हिमाचल के कृषि क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र ने जारी की ₹64.82 करोड़ की दूसरी किस्त : कृषि मंत्री चंद्र कुमार
नूरपुर : विनय महाजन /
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन ‘रबी अभियान 2026’ के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने प्रदेश के कृषि क्षेत्र के समग्र विकास, किसानों की आय बढ़ाने और पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
कृषि मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में करीब 88.85 प्रतिशत किसान सीमांत एवं लघु श्रेणी के हैं। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण, कृषि अवसंरचना, सिंचाई सुविधाओं, आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और बेहतर बाजार व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण हिमाचल में छोटी जोत, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अधिक उत्पादन लागत जैसी चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए पारंपरिक अनाज आधारित खेती के साथ सब्जी उत्पादन, फलोत्पादन, प्राकृतिक खेती और उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रो. चंद्र कुमार ने बताया कि भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश के कृषि क्षेत्र और किसानों के हित में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत ₹28.31 करोड़ तथा कृषि उन्नति योजना (KY) के तहत ₹36.51 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की है। इस तरह प्रदेश के लिए कुल ₹64.82 करोड़ की राशि जारी हुई है।
उन्होंने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन निधियों से प्रदेश में कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों को गति मिलेगी और इसका लाभ किसानों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन निधियों का प्रभावी एवं उचित उपयोग सुनिश्चित करेगी, ताकि अधिक से अधिक किसान केंद्र प्रायोजित योजनाओं से लाभान्वित हो सकें।
कृषि मंत्री ने कृषि अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों, पर्वतीय कृषि की जरूरतों और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि अनुसंधान को मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए कृषि अनुसंधान संस्थानों में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने, आधुनिक तकनीक अपनाने और मानव संसाधन को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्राकृतिक खेती के तहत उत्पादित मक्के के लिए ₹50 प्रति किलोग्राम और गेहूं के लिए ₹80 प्रति किलोग्राम का विशेष न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादन लागत अधिक होने और भौगोलिक परिस्थितियां कठिन होने के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना जरूरी है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में किसानों को समय पर और सटीक बाजार जानकारी उपलब्ध करवाना भी महत्वपूर्ण है। मंडियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर बाजार भाव, मांग एवं पूर्वानुमान, मौसम तथा भंडारण की उपलब्धता जैसी जानकारी मोबाइल संदेश और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जानी चाहिए।
कृषि मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार केंद्र के सहयोग से प्रदेश के कृषि क्षेत्र को सुदृढ़, टिकाऊ और किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।


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