चार साल में भी अधूरा फोरलेन! कंडवाल से भेड़खड्ड तक धीमी रफ्तार पर उठे सवाल
चार साल में भी अधूरा फोरलेन! कंडवाल से भेड़खड्ड तक धीमी रफ्तार पर उठे सवाल
जसूर : राकेश शर्मा /
कंडवाल से भेड़खड्ड तक बन रहा पठानकोट-मंडी फोरलेन क्षेत्र की जनता के लिए सुविधा के साथ अब सवाल का विषय भी बनता जा रहा है।
करीब 28 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य मई 2022 में शुरू हुआ था और इसे मई 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी सितंबर 2026 तक इसके कई हिस्सों में निर्माण कार्य जारी है।
मई 2022 में शुरू हुआ काम, मई 2024 थी डेडलाइन—फिर देरी क्यों?
इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से कंडवाल, नागाबाड़ी, जसूर, जाच्छ, नूरपुर क्षेत्र, नागनी, भड़वार, खज्जियां, टटल और भेड़खड्ड सहित कई क्षेत्र सीधे जुड़े हैं। परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में बेहतर और सुरक्षित यातायात सुविधा उपलब्ध करवाना है। हालांकि निर्माण कार्य लंबा खिंचने से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
निर्माण के बीच सुरक्षा भी बड़ा सवाल
निर्माणाधीन मार्ग पर यातायात संचालन, डायवर्जन, धूल-मिट्टी और सड़क की स्थिति को लेकर समय-समय पर लोगों की परेशानियां सामने आती रही हैं। दुर्घटनाओं और जनहानि को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान वाहन चालकों और आम जनता की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जनता पूछ रही—आखिर कब खत्म होगा इंतजार?
स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन का निर्माण जल्द पूरा होने से क्षेत्र को जाम, धूल-मिट्टी और निर्माणाधीन सड़क से जुड़ी अन्य परेशानियों से राहत मिल सकती है। अब लोगों की निगाहें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और निर्माण एजेंसी पर हैं।
लोग जानना चाहते हैं कि निर्माण कार्य में देरी का वास्तविक कारण क्या है, अब तक कितना कार्य पूरा हो चुका है, परियोजना की नई निर्धारित समयसीमा क्या है और निर्माणाधीन मार्ग पर सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
कंडवाल से भेड़खड्ड तक बनने वाला फोरलेन केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि हजारों लोगों के रोजमर्रा के आवागमन से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। ऐसे में क्षेत्रवासी अब इसके शीघ्र पूरा होने और निर्माण के दौरान सुरक्षित यातायात व्यवस्था की उम्मीद लगाए बैठे हैं।


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