दलित-आदिवासी स्वाभिमान सम्मेलन से हिमाचल की सियासत गरम, चमन राही ने उठाई ‘राहुल गांधी फॉर्मूले’ की मांग
दलित-आदिवासी स्वाभिमान सम्मेलन से हिमाचल की सियासत गरम, चमन राही ने उठाई ‘राहुल गांधी फॉर्मूले’ की मांग
अजय सूर्या मंडी। दिल्ली में 29 सितंबर को होने जा रहे दलित-आदिवासी स्वाभिमान सम्मेलन को लेकर हिमाचल की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में एआईसीसी एससी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। सम्मेलन दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया स्थित मावलंकर हॉल में साढ़े 12 बजे से 6 बजे तक आयोजित होगा।
इसी कड़ी में दलित, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग परिषद के महासचिव एवं राज्य प्रवक्ता चमन राही ने हिमाचल में दलित समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रियता बढ़ाई है। चमन राही ने अनुसूचित जाति विभाग कार्यकारी अध्यक्ष जीवन कुमार,वाल्मीकि समाज सुधार समिति संस्थापक चन्द्रवीर कागरा व अन्य पदाधिकारियों के साथ प्रदेश के शिमला ,कुल्लू, मंडी कांगड़ा जिलों का दौरा कर कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों के साथ बैठकें कीं।उन्होंने कहा कुल्लू में पूर्व वरिष्ठ मंत्री सत्य प्रकाश ठाकुर व अन्य दलिटन के साथ भी बैठक कर चर्चा की।इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल से भी मुलाकात कर दलित समाज का पक्ष रखा और संगठन में उनकी भागीदारी व प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी बात सामने रखी।
चमन राही ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने राहुल गांधी के बताए राजनीतिक फॉर्मूले को हिमाचल में लागू करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि प्रदेश में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की राजनीतिक भागीदारी को जनसंख्या के आधार पर और अनुसूचित जाती ,जनजाती की विभिन्न बराद्रियों को मजबूत करने की जरूरत है।
राही ने दावा किया कि अगर हिमाचल में यह फॉर्मूला लागू किया जाता है और समाज के इन वर्गों को संगठन तथा सत्ता में उचित भागीदारी मिलती है, तो कांग्रेस सरकार के दोबारा सत्ता में आने की संभावना मजबूत होगी। हालांकि, यह राही का राजनीतिक आकलन है।
दिल्ली में होने वाला सम्मेलन भी एससी-एसटी समुदायों से जुड़े मुद्दों और भेदभाव की घटनाओं पर चर्चा के लिए आयोजित किया जा रहा है। कांग्रेस के अनुसार, बैठक में आगे की रणनीति पर भी मंथन होगा।
चमन राही ने कहा पूर्व की जयराम स रकार द्वारा दलितों की अनदेखी की गई व विभिन्न योजनाओं को बंद करने के जो फैसला लिया है उस पर भी चर्चा करेगें।उन्होंने कहा कि जो भी दलितों की स्कीमों को लेकर पैसा आया था उसके हेलिपैड बना दिए इसकी भी जांच की मांग करेंगे।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि दिल्ली के सम्मेलन के बाद हिमाचल कांग्रेस में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की राजनीतिक भागीदारी को लेकर क्या नई दिशा तय होती है।

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