नेरचौक में मनाया अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, डिजिटल युग में नई साक्षरता की जरूरत पर जोर
नेरचौक में मनाया अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, डिजिटल युग में नई साक्षरता की जरूरत पर जोर
अजय सूर्या नेरचौक 8 सितम्बर। साक्षरता एवं जन विकास समिति तथा हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को नेरचौक में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया। इस दौरान साक्षरता के महत्व, शिक्षा के अधिकार और डिजिटल युग में डिजिटल, वित्तीय, स्वास्थ्य एवं मीडिया साक्षरता की बढ़ती आवश्यकता पर चर्चा की गई।
समिति के उपाध्यक्ष जोगिंदर वालिया ने कहा कि साक्षरता केवल पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझने, सही जानकारी हासिल करने, स्वतंत्र निर्णय लेने और रोजगार के अवसर प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। उन्होंने बताया कि यूनेस्को ने वर्ष 1966 में 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया था और वर्ष 1967 से इसे मनाया जा रहा है। इस वर्ष इसकी 60वीं वर्षगांठ है।
हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति की सह-सचिव रीना सिंह ने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में सही एवं गलत सूचना में अंतर करने तथा वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण विकसित करने की क्षमता बेहद जरूरी है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं, श्रमिकों, किसानों, गरीब परिवारों और वंचित समुदायों तक शिक्षा एवं निरंतर सीखने के अवसर पहुंचाने पर जोर दिया।
समिति के सचिव नंद लाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 2026 की थीम “लोगों, पृथ्वी और समृद्धि के लिए साक्षरता” है, जो साक्षरता को व्यक्तिगत विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ विकास और बेहतर आजीविका से जोड़ती है।
कार्यक्रम के दौरान सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज से हर व्यक्ति तक शिक्षा एवं साक्षरता पहुंचाने तथा वयस्क, डिजिटल और वैज्ञानिक साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि साक्षर समाज ही जागरूक समाज है और जागरूक समाज ही समानता, लोकतंत्र एवं सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रख सकता है।

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